
स्वागत द्वार में आयोजकों की फोटो पूरी गजानन सरकार की छवि अधूरी
बजरंग चौराहा गणेश महोत्सव में नजर आई आयोजकों की संवेदनहीनता
बनाए गए स्वागत द्वार के दोनों तरफ बैनर में गणेश जी की फोटो दिख रही अधूरी
कानपुर । श्री गणेश महोत्सव एक ऐसा धार्मिक आयोजन है जो हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखता है, जो हमारे अंदर के राष्ट्रीयता के भाव को दुनिया के सामने प्रतिबिम्बित करता है। एक ऐसा धार्मिक आयोजन जो पूरे भारत वर्ष में समावेशी समाज की परिकल्पना का साकार स्वरूप नजर आता है। एक धार्मिक पर्व जिसे राष्ट्रीय आंदोलन के लिए आवश्यक जनमत तैयार करने के पवित्र भाव के साथ बाल गंगाधर तिलक ने घरों की देहरी से बाहर लाकर सार्वजनिक आयोजन का रूप दिया। यह एक ऐसा आयोजन है जिसमें देश की धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता की झांकी नजर आती है। गणेश महोत्सव ही नहीं किसी भी धार्मिक, सामाजिक सार्वजनिक आयोजन में आयोजकों द्वारा गहन संवेदनशीलता की दरकार होती है। अधिकांश आयोजक अपने कर्तव्यों का अच्छे से पालन भी करते हैं। लेकिन कुछ जगह – कुछ अपरिपक्व और अज्ञानी भी होते हैं, जिनके कारण लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। ऐसा ही एक मामला यशोदा नगर बजरंग चौराहा गणेश महोत्सव में नजर आया है….
कानपुर नगर के यशोदा नगर स्थित बजरंग चौराहा के निकट होने वाले गणेश महोत्सव में आयोजकों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आयोजन स्थल पर बनाए गए स्वागत द्वार में आयोजकों की फोटो तो अच्छी तरह से बैनर में लगी हुई है परंतु गजानन सरकार की फोटो पूरी नहीं नजर आ रही है और यह गलती स्वागत द्वार में एक तरफ नहीं की गई है बल्कि स्वागत द्वार के दोनों तरफ आयोजकों ने अपनी तस्वीरों को तो अच्छे से लगवाया है लेकिन गणेश जी की तस्वीर किनारे पर और इस तरह लगाई गई है जो पूरी नजर नहीं द्वार के दोनों ही ओर तरफ तो गणेश जी का श्रीमुख नजर नहीं आ रहा। इस गणेश महोत्सव के स्वागत द्वार की स्थिति कार्यक्रम के आयोजकों की लापरवाही और संवेदनहीनता को परिलक्षित कर रही है।

गणेश भक्तों में आयोजकों के प्रति रोष
बजरंग गणेश महोत्सव समिति के बैनर तले बजरंग चौराहा के आसपास के कुछ लोगों द्वारा कराए जा रहे इस कार्यक्रम के स्वागत द्वार में गणेश जी की दिख रही आधी अधूरी छवि से लोगों के मन में रोष है। लेकिन आयोजकों के सामने कोई कुछ अभी बोल नहीं रहा है। कार्यक्रम स्थल के पास ही रहने वाले एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ये सब कैसे गणेश भक्त हैं जो खुद की फोटो पूरी लगा रहे हैं और गणेश भगवान की अधूरी फोटो इन्हें नजर नहीं आ रही है? वहीं एक अन्य व्यक्ति ने भी बिना नाम बताए कहा बैनर लगे तीन दिन बीत गए हैं लेकिन आयोजकों को ना तो अभी तक अपनी गलती का एहसास हुआ है और ना ही भूल सुधार किया गया है।

आयोजकों की गणेश भक्ति पर सवाल
समारोह स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित एक दुकान में काम करने वाले युवक ने कहा कि अधिकांश आयोजनकर्ता बहुत ही संवेदनशील होते हैं। आयोजन की छोटी से छोटी चीजों का ध्यान रखते हैं। कार्यक्रम स्थल पर अपनी पैनी दृष्टि रखते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजनों को क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने का शॉर्टकट मान लेते हैं। ऐसे लोगों का सारा ध्यान अपने पर ही केंद्रित होता है। इस युवक ने एक बड़े मार्के की बात कही, उसने कहा ऐसा तो हो नहीं सकता कि कमेटी के किसी सदस्य ने स्वागत द्वार देखा ना हो। हां यह संभव है कि बैनर पर लगी अपनी अपनी फोटो देखकर ये सभी आत्ममुग्धता में अंधे जैसे हो गए हों! इसीलिए अपनी फोटो के अलावा इन कमेटी वालों को कुछ और दिख ही नहीं रहा हो, यहां तक कि भगवान गणेश की आधी अधूरी छवि भी इन आत्ममुग्ध लोगों को नजर ना आई हो।