
न्याय की आस में भटक रहा परिवार, सीएम योगी से मिले परिजन
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
गाज़ीपुर/लखनऊ।
“मैं ब्राह्मण हूँ, मुझे न्याय नहीं चाहिए… यहाँ सब भ्रष्ट हैं। मेरे भाई की हत्या को हार्ट अटैक बताया जा रहा है। ले जाओ 10 लाख जो दिया है…”
यह शब्द हैं मृतक सियाराम उपाध्याय के बड़े भाई के, जिनकी आँखों में सिर्फ़ आंसू और दिल में गहरा आक्रोश है।
12 सितंबर को नोनहरा थाना क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने थाने में बंद कर बेरहमी से पिटाई की, जिससे दिव्यांग सियाराम ने दम तोड़ दिया। हाथ-पैरों पर चोटों के निशान, लाठीचार्ज की बर्बरता का दर्दनाक सबूत बने हुए हैं।
9 सितंबर 2025 को रुकूनुद्दीनपुर गाँव में बिजली के खंभे को लेकर प्रधान और पूर्व प्रधान के बीच विवाद हुआ। इसी को लेकर 20-25 ग्रामीण थाने पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि उसी दौरान पुलिस ने लाइट बंद कर निर्दोष लोगों पर डंडे बरसाए, जिसमें सियाराम बुरी तरह घायल हो गए। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते वक्त उनकी साँसें थम गईं। मृतक के भाई का कहना है—”सच्चाई को दबाने के लिए पुलिस हमारी पीड़ा को हार्ट अटैक का नाम दे रही है। हमें इंसाफ नहीं चाहिए, क्योंकि यहाँ सब बिक चुका है।”

न्याय की उम्मीद और बढ़ रही मायूसी
पीड़ित परिवार स्थानीय विधायक के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिला। सीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा। परिजनों का कहना है कि जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही ने लोगों के दिलों से न्याय की उम्मीद छीन ली है।
गांव के लोग स्तब्ध हैं। किसी के घर का बेटा, किसी का भाई, किसी का सहारा अब सिर्फ़ तस्वीरों में रह गया।



