
स्वराज इंडिया ब्यूरो | वॉशिंगटन/बीजिंग।
अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई व्यापार वार्ता ने तकनीकी मोर्चे पर भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुलाक़ात के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने TikTok को लेकर नरमी के संकेत दिए हैं। यह वही ट्रंप हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान TikTok पर प्रतिबंध लगाने तक की कोशिश की थी।
ट्रंप ने बातचीत के बाद कहा कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता न हो तो TikTok जैसे प्लेटफॉर्म अमेरिका के युवाओं और बिज़नेस के लिए उपयोगी हो सकते हैं। यह बयान उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है।
बदला हुआ राजनीतिक समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी चुनावी माहौल में ट्रंप का यह रुख युवाओं को साधने की रणनीति भी हो सकता है। TikTok अमेरिका में करोड़ों युवाओं की पहली पसंद है। ऐसे में इस वर्ग को नाराज़ करना उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता था।

व्यापारिक दबाव भी अहम
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन से व्यापारिक रिश्तों को पूरी तरह तोड़ना अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होगा। डिजिटल इकॉनमी में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा बन सकता है।
सुरक्षा का सवाल बरकरार
हालांकि ट्रंप ने साफ कहा है कि अमेरिका डाटा सुरक्षा और साइबर खतरों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। यही वजह है कि TikTok पर प्रतिबंध या नियमों में बदलाव की अंतिम स्थिति अभी साफ नहीं है।
आगे की राह
अब निगाहें बाइडेन प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर हैं। क्या TikTok को लेकर अमेरिका का रुख वास्तव में बदलेगा या यह केवल चुनावी बयानबाज़ी है—यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।


