Saturday, August 30, 2025
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भक्ति की तड़प ने 7वीं कक्षा के छात्र को लखनऊ से वृंदावन पहुंचा दिया

मां की डांट के बाद छोड़ा घर

प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया
लखनऊ।

भक्ति की तड़प इंसान को किसी भी सीमा तक ले जा सकती है। यही उदाहरण देखने को मिला जब लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र का 7वीं कक्षा का छात्र मां की डांट से नाराज होकर घर से साइकिल पर निकला और 400 किलोमीटर का सफर तय कर मथुरा के वृंदावन पहुंच गया। तीन दिन तक लगातार तलाश के बाद पुलिस ने छात्र को सुरक्षित बरामद कर परिजनों को सौंप दिया।
लखनऊ के बुद्धेश्वर इलाके का यह बच्चा 20 अगस्त की शाम किताब खरीदने के लिए अपनी मां से ₹100 मांग रहा था। मां ने कहा— “पढ़ाई नहीं करते, जब पापा आएंगे तब रुपए मिलेंगे।” यही बात उसके दिल को लग गई और नाराज होकर वह करीब साढ़े चार बजे घर से अपनी रेंजर साइकिल लेकर निकल पड़ा। देर शाम तक न लौटने पर परिजनों ने खोजबीन की और रात 8 बजे पुलिस को गुमशुदगी की सूचना दी।

मोबाइल पर सर्च की थी मथुरा की दूरी

पुलिस ने सीसीटीवी खंगाले तो छात्र कई जगह साइकिल चलाते हुए दिखाई दिया। जांच में यह भी सामने आया कि उसने मां के मोबाइल से मथुरा की दूरी गूगल पर सर्च की थी। यही खोज उसकी भक्ति यात्रा की पहली सीढ़ी साबित हुई।

आगरा एक्सप्रेस-वे से ट्रक में बैठकर पहुंचा आगरा

सीसीटीवी फुटेज में बच्चा काकोरी स्थित रेवरी टोल प्लाजा पर साइकिल से जाता दिखा। फिर बांगरमऊ कट से एक ट्रक पकड़ लिया। आगरा पहुंचकर उसने दोबारा साइकिल से यमुना एक्सप्रेस-वे का रास्ता लिया और वृंदावन की ओर निकल गया।

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के दर्शन की चाह

छात्र ने पुलिस को बताया कि वह प्रेमानंद महाराज का भक्त है और लंबे समय से उनके प्रवचन व वीडियो देखता था। उन्हीं से मिलने की तीव्र ख्वाहिश ने उसे यह कठिन यात्रा करने के लिए प्रेरित किया। वृंदावन पहुंचते ही उसने शर्ट उतारकर साइकिल की हैंडिल में बांध दी और रास्तेभर “राधे-राधे” नाम का जाप करता रहा।

भक्ति ने दिलाई मंजिल, पुलिस ने लौटाया घर

करीब 400 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर बच्चा जब वृंदावन पहुंचा तो पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए उसे सुरक्षित ढूंढ निकाला। फिर डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देश पर उसे परिवार को सौंपा गया।
यह घटना केवल एक गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर और संतों के प्रति बच्चों के मन में कैसी सच्ची आस्था और मासूम भक्ति हो सकती है। छोटी उम्र में भी अगर श्रद्धा हृदय में घर कर जाए तो इंसान कठिन से कठिन सफर तय करने में सक्षम हो जाता है।

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