
आयोग की संरचना और रिपोर्ट पर विपक्ष हमलावर
प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के कोर्ट-आदेशित सर्वे के दौरान भड़की हिंसा और क्षेत्र में दशकों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव पर गठित न्यायिक आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी। इस 450 पन्नों की रिपोर्ट ने कई सनसनीखेज तथ्य उजागर किए हैं, जिनके सामने आते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति डी.के. अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग ने यह रिपोर्ट तैयार की है। आयोग में पूर्व डीजीपी ए.के. जैन और पूर्व अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद सदस्य रहे। आयोग ने लगभग नौ माह की जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी। इस दौरान उनके प्रमुख सचिव संजय प्रसाद भी मौजूद रहे।
24 नवंबर 2024 की हिंसा
रिपोर्ट के अनुसार, शाही जामा मस्जिद परिसर में सर्वे के दौरान भारी पथराव, आगजनी और पुलिस पर हमला हुआ। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई, कई पुलिसकर्मी और आम नागरिक घायल हुए। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इस घटना से जुड़ी 12 एफआईआर दर्ज की गईं और 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई।
आज़ादी से अब तक 15 बड़े दंगे
पैनल की रिपोर्ट बताती है कि आज़ादी के बाद से अब तक संभल में 15 बड़े दंगे हो चुके हैं। प्रत्येक दंगे की तिथि, हताहतों का ब्यौरा और प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण रिपोर्ट में दर्ज है। आयोग का कहना है कि लगभग हर बार दंगों के पीछे सुनियोजित साजिश, राजनीतिक हस्तक्षेप और स्थानीय जनसांख्यिकीय असंतुलन की भूमिका सामने आई।

डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव
सबसे चौंकाने वाला खुलासा जनसंख्या के आंकड़ों से जुड़ा है। 1947 में संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत और मुसलमानों की 55 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार आज हिंदुओं की आबादी घटकर 15–20 प्रतिशत के बीच रह गई है, जबकि मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले 78 वर्षों में हिंदुओं की जनसंख्या में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है।
आयोग ने इस बदलाव के पीछे तुष्टिकरण की राजनीति, बार-बार दंगों की साजिश, भय का वातावरण और योजनाबद्ध पलायन को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट कहती है कि हजारों हिंदू परिवार भयवश संभल से पलायन कर गए।
मंदिर के साक्ष्य और हथियार बरामदगी का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद परिसर के सर्वे के दौरान हरिहर मंदिर के ऐतिहासिक साक्ष्य मिले, जिससे तनाव और बढ़ गया। आयोग ने यह भी दर्ज किया कि सर्वे के दौरान अवैध हथियार और विदेशी निर्माण सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई।
हिंसा से जुड़ी जांच में कुल 159 लोगों को आरोपी चिह्नित किया गया। विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने इस मामले में लगभग 4,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। रिपोर्ट में प्रत्येक एफआईआर, चार्जशीट और अभियुक्तों की विस्तृत सूची दर्ज की गई है।
आयोग ने सिफारिश की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को अधिक सतर्क रहना होगा। सामाजिक संवाद को बढ़ावा देने, संवेदनशील इलाकों में खुफिया तंत्र को मजबूत करने और योजनाबद्ध दंगों पर सख्ती से अंकुश लगाने की जरूरत बताई गई है।

यूपी की सियासत गरमाई
रिपोर्ट सामने आते ही राजनीति गरमा गई है। भाजपा इसे तुष्टिकरण और अतीत की गलत नीतियों का नतीजा बता रही है, वहीं विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि जनता की मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस रिपोर्ट को आगे लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार मुद्दों से भटकाने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने में जुटी है।
रिपोर्ट अब कैबिनेट में रखी जाएगी और उसके बाद विधानसभा में इस पर चर्चा की संभावना है। संभल हिंसा और जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े ये निष्कर्ष आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।