
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो प्रतापगढ़/कुंडा।
आज का समय ऐसा है कि पारिवारिक मनमुटाव और आपसी कलह रिश्तों को तोड़ने लगी है। छोटे घर-परिवार ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े खानदान भी इस संकट से अछूते नहीं रहे। जब संवाद और समझ खत्म हो जाते हैं तो रिश्तों की मजबूती भी दरकने लगती है।
इसी क्रम में पिछले कुछ दिनों से कुंडा से लगातार विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा रघुराज प्रताप सिंह (राजा भइया) और उनकी पत्नी भानवी सिंह के रिश्तों को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं । अब इस विवाद में बेटों की भी एंट्री हो गई है। बेटों ने पिता का समर्थन करते हुए मां द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मां स्वेच्छा से अलग रह रही हैं और दादा-दादी के समझाने के बावजूद घर लौटने को तैयार नहीं हैं। बेटों ने यह भी साफ़ किया कि पिता पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।

राजा भइया ने इस पूरे विवाद पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। जानकारों का कहना है कि यही शालीनता और मौन उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान यही रही है कि उन्होंने हमेशा साहस, स्वतंत्र छवि और मर्यादा को प्राथमिकता दी। सत्ता की आँधियों में अकेले दम पर खड़े रहना ही उन्हें लाखों युवाओं का आदर्श बनाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पारिवारिक विवाद भले ही आज हर घर की सच्चाई बन चुके हों, मगर राजा भइया ने जिस संयम का परिचय दिया है, वह उन्हें सचमुच “राजा” बनाता है। कहा भी गया है—
“राजा सिर्फ नाम से नहीं, कर्म और चरित्र से भी राजा होता है।”



