
प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि प्रदेश में काम करने वाले हर कर्मचारी को न्यूनतम मजदूरी हर हाल में मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्राइवेट कंपनी को अब श्रमिकों का शोषण करने की इजाजत नहीं होगी और सभी कर्मचारियों को उचित वेतन देना अनिवार्य होगा। यदि कंपनियों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा तो उसे राज्य सरकार वहन करेगी।
योगी आदित्यनाथ लखनऊ में तीन दिवसीय “रोजगार महाकुंभ 2025” का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां प्रत्येक कामकाजी युवा के लिए न्यूनतम वेतन और रोजगार की गारंटी लागू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दौर में पूरा का पूरा गांव रोज़गार के लिए पलायन कर जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। पिछले आठ वर्षों के सुनियोजित प्रयासों से आज यूपी खुद युवाओं को रोजगार दे रहा है और यहां की प्रतिभा की मांग देश-दुनिया में हो रही है।
ओडीओपी और एमएसएमई से नई पहचान
योगी ने बताया कि ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना ने परंपरागत उद्योगों को नई पहचान दी है। एमएसएमई सेक्टर में 96 लाख इकाइयाँ पुनर्जीवित हुई हैं। कोरोना काल में जब 40 लाख से ज्यादा प्रवासी लौटे, तब इन्हीं यूनिट्स ने 90 फीसदी कामगारों को रोजगार दिया। आज भी वे उसी व्यवस्था से जुड़े हैं।
सरकार ने एमएसएमई उद्यमियों को 5 लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराया है। हर यूनिट 2 से 10 युवाओं को रोजगार दे रही है, जिससे लाखों लोग प्रदेश में सम्मानजनक काम पा रहे हैं।
कारीगरों और युवाओं के लिए योजनाएं
सीएम ने बताया कि “विश्वकर्मा श्रम सम्मान” और “पीएम विश्वकर्मा” योजनाओं के जरिए परंपरागत कारीगरों—जैसे बढ़ई, लोहार, कुम्हार, नाई, मोची और सोनार—को मुफ्त टूलकिट, प्रशिक्षण और सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
साथ ही 24 जनवरी 2025 को शुरू हुई “सीएम युवा उद्यमी योजना” के तहत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को बिना गारंटी, ब्याजमुक्त ऋण मिल रहा है। अब तक 70,000 से अधिक युवाओं ने इसका लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया है।
सरकारी नौकरी और निवेश
योगी ने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों में पारदर्शिता के साथ 8.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है, जिनमें पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और विश्वविद्यालयों में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं।
इसके अलावा 33 से ज्यादा सेक्टोरियल पॉलिसी लागू कर “इन्वेस्ट यूपी” और “सिंगल विंडो सिस्टम” के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश जमीन पर उतरा है। इससे 60 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।
रोजगार महाकुंभ का मकसद
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रोजगार महाकुंभ सिर्फ नौकरी का मंच नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री और युवाओं को जोड़ने का सेतु है। इससे नई टेक्नोलॉजी के अनुरूप ट्रेनिंग और कोर्स भी तय होंगे।
उन्होंने कहा—“जब श्रमिक और किसान खुशहाल होंगे, तभी प्रदेश और देश खुशहाल होगा। विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की राह अब कोई ताकत रोक नहीं सकती।”