नेता वाट्सएप व फेसबुक के जरिए साझा कर रहे दुख-दर्द, तेजी से राजनीति के तौर तरीके बदले
शंकर सिंह, स्वराज इंडिया
कानपुर देहात ।
वक्त गुजरने के साथ ही परंपरागत चुनाव प्रचार अभियान की तस्वीर भी बदल गई है। वाहनों में पोस्टर, बैनर लगाकर भोपू वाले बाजा से गांव-गांव प्रचार-प्रसार अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। जनता के साथ नेताजी भी खुद को हाईटेक बनकर सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
मलासा गांव के जगदेव सिंह, डीघ के केदार सिंह ने बताया की डेढ़ दशक पहले तक उम्मीदवार वोटरों के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए पार्टी का झंडा और भोंपू (लाउडस्पीकर) लगे वाहन से गांव की गलियों में धूल फांकते थे। अचार-प्रसार के लिए हँडबिल, पोस्टर, बैनर के साथ धुआंधार नारेबाजी होती थी। पर अब सब कुछ बदल गया है। बदले सियासी समीकरण में राजनीतिक दल अब चुनाव के ऐन वक्त उम्मीदवारों की घोषणा करते हैं। ऐसे में प्रचार के सीमित समय में मतदाताओं तक पहुंचना नामुमकिन होता है। लिहाजा हाईटेक तरीके से प्रचार किया जा रहा है। भोपू, बैनर, पटका , बिल्ला की जगह सोशल मीडिया ने ले ली है। नेताओं ने भी सोशल मीडिया को प्रचार के लिए बेहतर प्लेटफार्म मान लिया है। हर नेता मोबाइल के जरिए सोशल मीडिया से जुड़कर दिन भर जनता के बीच रहना पसंद कर रहा है। फेसबुक, ह्वाट्सएप, ट्यूटर, इंस्टाग्राम प्रचार सामग्री से अटे पड़े हैं। कौशाम्बी में तकरीबन सभीउम्मीदवार सोशल लिए समय कम मिलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
अपनी बात रखने और विपक्षियों के आरोपों का जवाब देने में कर रहे हैं।
उम्मीदवारों की मानें तो सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार करना काफी सस्ता है। इसमें नाम मात्र का ही खर्च आता है। अपने चुनावी प्रचार पोस्टर कर डिजिटल फॉर्मेट तैयार करवाकर बस उसे फेसबुक और ह्वाट्सएप पर पोस्ट किया जा रहा है। उम्मीदवार पोस्टर को पोस्ट करके लोगों को टैग कर रहे हैं तो कभी ह्वाट्सएप पर अपने चुनावी पोस्टर भेजकर हक में वोट देने की अपील कर रहें है।
प्रत्याशियों की पल पल की जानकारी वोटरों के फोन में …
उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए भले ही हर घर और हर मतदाता तक स्वयं न पहुंच पाएं। लेकिन उनकी बात ऑडियो वीडियो या लिखित संदेश के जरिए वोटरों के मोबाइल फोन तक जरूर पहुंच रही है। यही नहीं राजनीतिक दल और उनकी नीतियां तथा सूचनाओं को आम जनता तक पहुंचाने के लिए अपन-अपने मोबाइल एप भी रखते हैं। ऑनलाइन प्रचार से एक फायदा ये भी है कि कम समय में ज्यादा लोगों तक पहुंच बन रही है। इसलिए भी उम्मीदवारों का रुझान सोशल मीडिया के जरिए चुनाव प्रचार करने के लिए बढ़ा है। उम्मीदवारों का मानना है कि युवा वर्ग सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। ऐसे में इस वर्ग के वोटर तक सबसे अधिक पहुंच बनाने के लिए इससे बेहतर कोई दूसरा माध्यम नहीं हो सकता है।