अयोध्या की सांस्कृतिक आत्मा पर चोट, संगीतकारों में गुस्सा

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो अयोध्या। प्रमोद वन मार्ग के नामकरण को लेकर महापौर के वादाखिलाफी ने अयोध्या की सांस्कृतिक गरिमा को गहरा आघात पहुंचाया है। विश्वविख्यात पखावज वादक स्वामी पागलदास के नाम पर मार्ग का नाम रखने की पूर्व घोषणा के बावजूद, महापौर ने कल इस मार्ग का नाम शंकराचार्य के नाम पर कर उद्घाटन कर दिया।
वादाखिलाफी के सबूत
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और वीडियो इस बात के प्रमाण हैं कि महापौर ने पहले स्वामी पागलदास के नाम पर मार्ग का नामकरण करने की घोषणा की थी। बदलते निर्णय से कलाकारों, नागरिकों और सांस्कृतिक संगठनों में गहरी नाराजगी है।

कलाकारों की वेदना
स्वामी पागलदास के शिष्य विजय रामदास ने कहा “यह केवल मेरे गुरु का नहीं, अयोध्या की संगीत परंपरा का अपमान है। यह वही परंपरा है जिसने इस नगरी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
राजनीतिक दबाव के सवाल
कला जगत से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं क्या यह बदलाव किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम है?
क्या स्वामी पागलदास के सामाजिक दृष्टिकोण और आंदोलनकालीन रुख को लेकर असहमति उनके योगदान पर भारी पड़ गई?

सांस्कृतिक धरोहर पर चोट
स्वामी पागलदास ने अपने जीवन में केवल संगीत की साधना नहीं की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का संदेश भी दिया। रामजन्मभूमि आंदोलन के दौर में उन्होंने हमेशा न्याय और मर्यादा की बात की। यही रुख उन्हें कुछ संगठनों की आंख की किरकिरी बना गया था।
संगीतकारों की मांग
कला जगत और नागरिकों ने मांग की है कि मार्ग का नाम स्वामी पागलदास के नाम पर ही रखा जाए। उनका कहना है कि यह न केवल एक कलाकार का सम्मान है बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक आत्मा की रक्षा का प्रश्न भी है।
