Tuesday, February 17, 2026
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कानपुर के सरकारी अस्पतालों में मची लूट:आयुष्मान कार्ड धारकों से भी मंगाई जा रही बाहर की दवा

ECG और शुगर टेस्ट का भी ले रहे चार्ज

स्वराज इंडिया कानपुर | कानपुर के सरकारी अस्पतालों में इन दिनों जमकर धांधली चल रही है। डॉक्टर और स्टाफ नर्स सभी अधिकारियों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। आईसीयू के अंदर भर्ती मरीज के शुगर टेस्ट और ECG टेस्ट के नाम पर भी पैसे वसूले जा रहे हैं। यह काम कानपुर के यूएचएम हॉस्पिटल (उर्सला) में किया जा रहा है। वहीं, कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों से भी बाहर की दवाइयां मंगाई जा रही है। मीडिया टीम ने दोनों अस्पतालों में जाकर जब तिमारदारों से हकीकत जानी तो अस्पताल प्रशासन व वहां के कर्मचारियों की पूरी पोल खुल गई।
आयुष्मान कार्ड न होने पर दवाइयां मंगवाते बाहर से
उर्सला अस्पताल में दीमारदारों की जेब ढीली करने के लिए उन्हें बेवकूफ बनाने का काम किया जा रहा है। आईसीयू में भर्ती मरीज के तीमारदारों ने बताया कि यहां पर स्टाफ द्वारा बताया गया है कि अगर आयुष्मान कार्ड नहीं है तो दवाइयां बाहर से लानी पड़ेगी, जिनका आयुष्मान कार्ड है भी तो उन्हें थोड़ी बहुत दवाइयां लानी पड़ेगी। इसके साथ-साथ उन्हें यह भी बताया जा रहा है कि बाहर किस मेडिकल स्टोर से दवा मिलेगी।

चार दिन में लग गई 23 हजार की दवा
उर्सला के आईसीयू में भर्ती 75 वर्षीय अनीशा जहां के घर वालों ने बताया कि 11 मार्च को पैरालिसिस का अटैक होने पर उन्हें भर्ती कराया गया था। इसके बाद से उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया, तब से वह आईसीयू में भर्ती हैं। बेटे सिराज ने बताया कि रोज सुबह-शाम दवा बाहर से लानी पड़ती है। चार दिन में लगभग 22- 23000 की दवा अभी तक ला चुके हैं। इसके अलावा जितनी बार शुगर टेस्ट किया जाता है। उसका 50 रुपये अलग से चार्ज किया जाता है और ECG टेस्ट कराने के लिए 100 रुपये चार्ज लगाए जाते हैं।

दवाइयां किसको लग रही, कहां जा रही कुछ पता नहीं
आईसीयू के अंदर भर्ती मरीजों के घर वालों ने कहा कि अंदर कौन सी दवा लग रही या कौन सी नहीं लग रही, इसके बारे में भी डॉक्टर कुछ नहीं बताते, जबकि सुबह शाम यहां पर घर वालों को दवा के लिए पर्चे पकड़ाए जाते हैं, जो कि बाहर से लाना पड़ता है।
ऑपरेशन के लिए 4000 का लाए सामान
गोविंद नगर के राम आश्रेय नगर निवासी मनीष प्रजापति के गले में गांठ थी। उनका आयुष्मान कार्ड भी बना है। मनीष की पत्नी आरती ने बताया कि एक माह पूर्व हैलट अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद 4000 रुपये की दवा मंगवाई गई। इसके अलावा भी बीच-बीच में कुछ दवाइयां बाहर से मंगवाई जाती है और कुछ दवाइयां अंदर से देते हैं।

आयुष्मान कार्ड है लेकिन बाहर से लानी पड़ती दवा
शिवराजपुर निवासी बबलू गौतम मार्ग दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनका बयां पैर टूट गया था। 4 मार्च को हैलट में उन्हें भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्लास्टर चढ़ाने के बाद आयुष्मान वार्ड में शिफ्ट कर दिया। कहने को वह आयुष्मान वार्ड में है, लेकिन परिजनों ने बताया कि रोजाना दवा बाहर से लानी पड़ती है। अभी तक 3 से 4000 की दवा बाहर से ला चुके हैं।

बोले जिम्मेदार

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि अभी तक इस तरह की कोई शिकायत मेरे पास लेकर नहीं आया हैं। यदि उर्सला में ऐसा चल रहा है तो मामले को गंभीरता से दिखवाया जाएगा। जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

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