
आलाधिकारियों की बेरुखी ने बदहाली की ओर धकेला, कर्मचारी असुरक्षा में काम करने को मजबूर
स्वराज इंडिया कानपुर। स्मार्ट सिटी का दर्जा पा चुके कानपुर नगर का जिला सूचना कार्यालय आज अपनी ही बदहाली की दास्तान कह रहा है। ऐतिहासिक गांधी भवन, फूलबाग से संचालित यह कार्यालय आलाधिकारियों की उदासीनता और उपेक्षा का शिकार है। नतीजा यह है कि यहां काम करने वाले कर्मचारी हर दिन दहशत और असुरक्षा के बीच अपने दायित्व निभाने को विवश हैं।
दीवारों में चौड़ी दरारें, बरसात में टपकती छत और रखरखाव के अभाव में बदतर हालात—ये दृश्य साफ बताते हैं कि जहां से जिलेभर की योजनाओं और सरकारी गतिविधियों की सूचनाएं प्रसारित होनी चाहिएं, वही कार्यालय खुद अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहा है।

यहां न तो आधुनिक उपकरण हैं और न ही कामकाज के लिए बुनियादी सुविधाएं। पुराने कंप्यूटर-प्रिंटर और धूल खाती फाइलों के बीच काम करना कर्मचारियों के लिए खतरे से खाली नहीं है। लगातार मानसिक दबाव और जर्जर भवन की चिंता ने उनकी कार्यक्षमता पर भी असर डाल दिया है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि शासन-प्रशासन को बार-बार पत्राचार और शिकायतें भेजे जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रस्तावित “सूचना संकुल” योजना अभी तक महज फाइलों तक सीमित है। मंडल और जिला स्तरीय बैठकों में भी इस गंभीर मुद्दे पर शायद ही कभी चर्चा होती है।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यह स्थिति न केवल उनकी सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि सरकारी सूचना तंत्र की विश्वसनीयता पर भी धब्बा है।
अब समय आ गया है कि शासन इस मसले को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक “सूचना संकुल” के निर्माण की दिशा में ठोस पहल करे, ताकि कर्मचारी सुरक्षित वातावरण में काम कर सकें और योजनाओं का संदेश जनता तक निर्बाध पहुंच सके।
