
पनकी इंस्पेक्टर मानवेंद्र सिंह पर जूतों से पीटने और जातिसूचक गालियां देने का आरोप, पड़ोसी से विवाद के बाद थाने पहुंचे थे दोनों पक्ष, आरोप हैं कि जातिवादी मानसिकता से ग्रसित इंस्पेक्टर ने अपमानित किया
प्रमुख संवाददाता, दैनिक स्वराज इंडिया
कानपुर। कानपुर पुलिस की बेलगाम कार्यप्रणाली का एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। पनकी थाने में कथित तौर पर युवक को न सिर्फ अपमानित किया गया, बल्कि थाने के भीतर ही जूतों से पीटते हुए जातिसूचक गालियां भी दी गईं। पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा, लेकिन जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो अंततः वह लखनऊ जाकर पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचा।
सिटी के रतनपुर निवासी सत्यम त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि 25 अप्रैल 2025 को पड़ोसी के साथ नाली को लेकर विवाद हुआ था। मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया। लेकिन, सत्यम का कहना है कि इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह ने पक्षपात करते हुए उसके पड़ोसी को कुर्सी पर बैठाया और उसे जमीन पर बैठाकर अपमानित किया।
सत्यम का आरोप है कि इसी दौरान इंस्पेक्टर ने न सिर्फ उन्हें गालियां दीं, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जूतों से पीटा। “मैं इंसाफ की उम्मीद लेकर थाने गया था, लेकिन वहां मेरे साथ ऐसा व्यवहार हुआ जैसे मैं कोई अपराधी हूं।” – सत्यम ने रोते हुए बताया।
शिकायत पर भी नहीं हुई सुनवाई
पीड़ित ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी। लेकिन कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इंसाफ की उम्मीद टूटने पर उन्होंने लखनऊ जाकर अपनी आपबीती पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सुनाई।
मुलाकात के दौरान सत्यम भावुक हो उठे और फूट-फूटकर रो पड़े। अखिलेश यादव ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी हर स्तर पर न्याय दिलाने का प्रयास करेगी।
सपा ने उठाई पीड़ित की आवाज
सपा युवजन सभा के महानगर अध्यक्ष अर्पित त्रिवेदी ने इस पूरे प्रकरण को मानवाधिकार का खुला उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा— “थाने में जातिसूचक गालियां देना और जूतों से मारना शर्मनाक है। यह पुलिस की बेलगाम कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था की सच्चाई उजागर करता है। हम इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हैं।”
पुलिस का पलटवार
वहीं, इस मामले पर पनकी थानाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि सत्यम और उसके पड़ोसी के बीच विवाद हुआ था, जिसमें पड़ोसी ने ही मारपीट की थी। पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई की।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्यम के खिलाफ पहले से ही पनकी और गुजैनी थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में वह खुद को पीड़ित साबित करने के लिए झूठे आरोप गढ़ रहा है।

न्याय और व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला केवल एक युवक की व्यथा नहीं, बल्कि बेलगाम पुलिसिंग और आम नागरिकों की सुरक्षा व सम्मान से जुड़े गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब थाने में ही न्याय मांगने वाला व्यक्ति अपमानित और प्रताड़ित हो, तो व्यवस्था पर जनता का भरोसा कैसे कायम रह पाएगा?
सत्यम त्रिवेदी का संघर्ष अब पुलिस और सियासत के बीच टकराहट का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस मामले में पीड़ित को न्याय मिलता है या यह प्रकरण भी कई अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।