Friday, February 13, 2026
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सीएमओ कार्यालय की कृपा से गली कूचों में अवैध निजी नर्सिंग होम

बिना लाइसेंस, बिना डाक्टर चल रहे कई ऑपरेशन थियेटरअवैध अस्पतालों पर सीएमओ का शिकंजा,हिल गए नर्सिंग होम माफिया

स्वराज इंडिया संवाददाता
अयोध्या।

गली-कूचों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक चल रहे अवैध नर्सिंग होम वर्षों से मरीजों की जान से खिलवाड़ करते आ रहे हैं। शिकायतें होती रहीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद तब तक नहीं खुली जब तक कि कुछ दर्दनाक हादसों ने पूरे सिस्टम को झकझोर नहीं दिया। अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुशील कुमार बनियान की अगुवाई में जिले में अवैध अस्पतालों के खिलाफ अभियान शुरू हुआ है। इस कार्रवाई से आम लोगों में एक नई उम्मीद जगी है लेकिन इसके बाद भी सुधार नहीं है।
अयोध्या जिले में बीते वर्ष तक करीब 180 नर्सिंग होम पंजीकृत थे, मौजूदा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 288 पंजीकृत नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाऊंड, क्लीनिक है लेकिन हकीकत यह है जनपद में लगभग 1800 से अधिक छोटे बड़े नर्सिंग होम क्लीनिक पैथोलॉजी चल रहे हैं। शहर में कई नर्सिंग होम बिना अनुमति के भीड़भाड़ वाले इलाकों, रिहायशी मकानों और सरकारी क्वार्टर्स में संचालित हो रहे हैं। न तो फायर सेफ्टी है और न ही एंबुलेंस की सुविधा। इन अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों का कोई स्थायी रिकॉर्ड नहीं होता, केवल ऑपरेशन के समय बाहर से विशेषज्ञ बुलाए जाते हैं।
दलालों के जाल में फंसते हैं मरीज
सरकारी अस्पतालों के बाहर इन अवैध नर्सिंग होम के दलाल तैनात रहते हैं। यह मरीजों को बहला-फुसलाकर मोटे कमीशन के लालच में उन्हें ऐसे अस्पतालों तक पहुंचाते हैं, जहां गलत इलाज या गलत ऑपरेशन से उनकी जान तक चली जाती है। कई हाई प्रोफाइल मामलों में ही जांच होती है, बाकी शिकायतें दबा दी जाती हैं।
जांच की आड़ में फाइलें होती रहीं बंद
स्वास्थ्य विभाग पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि अब तक ज्यादातर शिकायतों में केवल औपचारिक जांच की गई और बाद में फाइलें बंद कर दी गईं। अब जब सीएमओ ने खुद मोर्चा संभाला है तो कार्रवाई की सुगबुगाहट लोगों में चर्चा का विषय बन गई है।
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सीएमओ का बयान
“अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम और क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। कोई भी व्यक्ति इनके खिलाफ शिकायत कर सकता है, और उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।”
— डॉ. सुशील कुमार बनियान, सीएमओ
अवैध नर्सिंग होम की काली करतूतें

  1. नाका में फिजिशियन ने किया ऑपरेशन, जच्चा-बच्चा की मौत
    नाका क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में दो अक्तूबर 2022 को गीता कनौजिया और उनके नवजात की सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मौत हो गई। जांच में सामने आया कि अस्पताल का पंजीकरण नहीं था और ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर केवल फिजिशियन के रूप में पंजीकृत था। मामला तूल पकड़ने पर जांच हुई लेकिन उसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
  2. इंजेक्शन से गई बच्चे की जान
    जुलाई 2024 में खंडासा क्षेत्र के भखौली चौराहे पर स्थित एक अवैध क्लीनिक में इलाज के दौरान छह साल के शिवांश की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर के लगाए इंजेक्शन से उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। पुलिस ने डॉक्टर पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया।
  3. सर्जन न होने के बावजूद हुआ ऑपरेशन, फिर मौत
    बीकापुर के अमित कुमार की पत्नी महिमा का देवकाली के एक नर्सिंग होम में सिजेरियन ऑपरेशन हुआ, लेकिन ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि अस्पताल में कोई अधिकृत सर्जन नहीं था। तत्कालीन सीएमओ ने अस्पताल को सील कर दिया था।

  4. जनता की उम्मीदें जागीं, निगरानी जरूरी
    इन घटनाओं ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि यह सवाल भी उठाया कि कितनी और जानें जाने के बाद सिस्टम जागेगा? फिलहाल सीएमओ की पहल से कुछ उम्मीदें जागी हैं, लेकिन यह कार्रवाई तभी असरदार होगी जब निगरानी और जवाबदेही लगातार बनी रहे।
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