
स्वराज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो | प्रमुख संवाददाता
गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। शुक्लागंज में जलस्तर खतरे के निशान 114 मीटर से केवल 81 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। यह इस साल का सबसे ऊंचा स्तर है जिसने लोगों में दहशत फैला दी है। मंगलवार को जलस्तर 113.19 मीटर तक पहुंच गया।परमट मंदिर की सीढ़ियों तक पानी पहुंच चुका है। उन्नाव से कानपुर का संपर्क मार्ग कट गया है और तीन पुलों से आवागमन रोकना पड़ा है। हजारों लोग रोजमर्रा के कामकाज के लिए जाम और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन व सिंचाई विभाग लगातार गंगा किनारे निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी में है।
गांवों में जलभराव, फसलें और मवेशी संकट में

बिठूर की कटरी पट्टी के 18 गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। घरों में पानी घुसने के बाद 400 से ज्यादा परिवार छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। सात गांवों के 460 परिवार गंगा बैराज स्थित शिविरों में शरणार्थी जीवन जी रहे हैं।खेती-किसानी पर भी बाढ़ का गहरा असर पड़ा है। लौकी, कद्दू, तरोई, बैंगन और अमरूद की 2000 बीघा से ज्यादा की फसल पानी में डूबकर चौपट हो गई। भूसा और चारा भीगने से मवेशियों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया। गांवों में चार फीट तक पानी भरने से संपर्क कट गया है और नाव व ट्रैक्टर ही आवाजाही का सहारा बने हैं।
उन्नाव और फत्तेपुर चौरासी में भी बिगड़े हालात

उन्नाव जिले की 128 किमी लंबी कटरी पट्टी में सैकड़ों गांव जलमग्न हैं। गंजमुरादाबाद, बांगरमऊ, फत्तेपुर चौरासी, परियर और गंगाघाट से लेकर बक्सर तक लोग बाढ़ से त्रस्त हैं। परिषदीय विद्यालय, आश्रय स्थल और बिजली आपूर्ति प्रभावित हैं।डीएम गौरांग राठी और एसपी दीपक भूकर ने फत्तेपुर चौरासी क्षेत्र का निरीक्षण किया और आपात कदम उठाने के निर्देश दिए। दूलीखेड़ा, मंझा और धरमपुर जैसे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। वायरल बुखार फैल रहा है और लोग निजी चिकित्सकों पर निर्भर हैं। किसानों का नुकसान कई गुना बढ़ गया है और मवेशियों का संकट भी गहरा रहा है।

मुख्य बिंदु
- शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 81 सेंटीमीटर नीचे।
- बिठूर की कटरी पट्टी के 18 गांव बाढ़ की चपेट में, 400+ परिवार छतों पर शरण।
- 460 परिवार गंगा बैराज शिविरों में, बिजली कटौती से रातें अंधेरे में।
- 2000 बीघा से ज्यादा फसल डूबी, मवेशियों के सामने चारे का संकट।
- उन्नाव और फत्तेपुर चौरासी में सैकड़ों गांव प्रभावित, स्वास्थ्य सेवाएं ठप।
- प्रशासन ने राहत शिविर और नावें तैनात कीं, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक अभी भी अपर्याप्त।



