Saturday, August 30, 2025
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कानपुर विकास प्राधिकरण और पुलिस की मिलीभगत से चल रहा फर्जी ‘प्लॉट उद्योग’

केडीए-पुलिस की मिलीभगत से अधिकतर एफआईआर ’जीरो’

पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी की शिकायत पर सांसद रमेश अवस्थी ने भेजी चिटठी से हुआ खुलासा

केडीए के कई अफसरों और पुलिस कर्मचारियों की भूमिका पर उठते रहे सवाल, प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई

प्रमुख संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।

महानगर कानपुर में पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने अपराधियों एवं माफियाओं के समूल सफाया के लिए ऑपरेशन महाकाल लांचकर कार्रवाई शुरू की तो बडे बडे चेहरे बेनकाब हो हो रहे हैं। इनमें जमीनों के कई सौदागर भू-माफिया बनकर समाज से लेकर कई सरकारी विभागों का खूब भटटा बैठाया। दरअसल, कार्रवाई तो पहले भी होती थीं लेकिन वह कागजों तक ही सीमित रहती थीं इसके चलते खिलाडियों के हौंसले बढते गए। दावा है कि केडीए के करीब 3 सौ अधिक प्लाट सिंडीकेंट ने अभिलेखों में हेराफेरी करके हडप लिए, इनपर एफआईआर हुई लेकिन हुआ कुछ नहीं।
सांसद रमेश अवस्थी की कवरिंग लगी एक चिटठी 15 अगस्त 2025 को पुलिस कमिश्नर को भेजी गई है। इसमें पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी के पत्र का हवाला देते हुए कुछ बडे ख्ुालासे किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि फर्जी ढंग से केडीए के हडपे गए भूखंडों को लेकर तत्समय करीब 23 एफआईआर लिखी गई। इनमें दावा है कि अधिकतर में पुलिस द्वारा कोई प्रभावी एक्शन नहीं लिया गया। आरोपियों से मिलीभगत मामला सुलटा लिया गया। 9 जून 2025 को केडीए वीसी मदन सिंह गर्ब्याल ने पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि कूटरचित तथ्यों के आधार पर विभिन्न भूखंडों को हथियान के मामले में वर्ष 2023 में दर्ज की एफआईआर संख्या 007, 0028,0019, 0031, 0026, 0030, 0029, 0023, 0024 में कोई वैधानिक एक्शन लिया गया। पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी ने कहा कि इस पूरे खेल में केडीए और स्थानीय पुलिस के कुछ लोग भी शामिल हैं जो सुनियोजित ढंग से भूखंडों में खेल किया। एफआईआर तो सिर्फ रस्म अदायगी के लिए हुई। केडीए ने ऐसे भूखंड आजतक नहीं खाली करवाए।

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20 सालों से चल रहा कूटरचित आधार पर प्लॉट कब्जाने का उद्योग

पूर्व विधायक ने कहा कि केडीए के प्लाट और जमीन हथियाने में पूरा सिंडीकेट है। प्राधिकरण कर्मी, पुलिस और कुछ अधिवक्ता मिलकर अरबों रूपयों के प्लाट पी गए। केडीए ने जिन भूखंडों में एफआईआर दर्ज कराई, उनका कब्जा वापिस नहीं लिया गया। दावा है कि एफआईआर के बाद भी 15 प्लाटों में मल्टीस्टोरी बिल्डिंगें खडी कर दी गई। केडीए कर्मचारी इसमें शामिल होकर अपना हित खोजते रहे। कई अर्जित जमीनों के कागजों में खेल करके बेंच दिया गया। इनकी अगर सही से जांच की जाए तो बडे बडे खेल सामने आ जाएंगे।

मिलीभगत से एक्सिस कॉलेज को बेंची गई चारागाह की जमीन

बीते दिनों नर्वल तहसीलदार विनीता तिवारी ने खुलासा किया था कि रूमा स्थित एक्सिस इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा चारागाह की करीब 15 बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा किया गया है। इसमें कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि केडीए ने उसे जमीन बेंची है। जब कि नियमानुसार चारागाह की जमीन का विक्रय नहीं हो सकता है तो ऐसे में आशंका है कि केडीए और कॉलेज प्रबंधन के बीच लंबी डील के तहत अरबों की जमीन कौडियों में दे दी गई। अब फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। केडीए वीसी मदन सिंह गर्ब्यांयाल ने कहा कि इस मामले की जानकारी है, इसकी पत्रावली चेक कर जानकारी की जाएगी।

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