Friday, February 13, 2026
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जज़्बातों ने खामोशी से बात की’ – अखिलेश-आज़म मुलाकात से सियासी पारा गर्म, क्या सुलझ गई सपा की अंदरूनी कलह?

मुख्य संवाददाता – स्वराज इंडिया लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की सियासत में सोमवार का दिन समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए बेहद अहम साबित हुआ। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान की मुलाकात ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि इसने यह भी संकेत दिया कि शायद सपा के भीतर की पुरानी दरारें भरने की शुरुआत हो गई है।

करीब डेढ़ घंटे तक चली इस मुलाकात में किसी ने भी औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन जो बात जुबान से नहीं निकली, वो जज़्बातों ने बखूबी कह दी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अखिलेश और आज़म के बीच की यह ‘खामोश बातचीत’ आने वाले दिनों में सपा की रणनीति और चेहरे, दोनों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

लंबे समय बाद आमने-सामने हुए दोनों नेता

आज़म ख़ान की रिहाई के बाद यह अखिलेश यादव से पहली औपचारिक मुलाकात मानी जा रही है। रामपुर के सियासी किले के माने जाने वाले आज़म ख़ान पिछले कुछ महीनों से पार्टी से दूरी बनाए हुए थे। कई मौकों पर उन्होंने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व की उपेक्षा को लेकर नाराज़गी भी जताई थी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने इस मुलाकात के दौरान आज़म ख़ान को भरोसा दिलाया कि आने वाले चुनावों में उनकी भूमिका फिर से मज़बूत होगी। वहीं आज़म ख़ान ने भी संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की बात कही।

सुलह या सियासी मजबूरी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों पक्षों की सियासी ज़रूरतों का संगम भी है। एक ओर अखिलेश यादव को मुस्लिम वोट बैंक को फिर से एकजुट करने की दरकार है, वहीं आज़म ख़ान भी यह जानते हैं कि बिना पार्टी नेतृत्व के समर्थन के रामपुर की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखना मुश्किल होगा।
इसलिए यह मुलाकात दोनों के लिए “दिल और सियासत, दोनों को सुकून देने वाला क्षण” बताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक बातचीत में उठे कई मुद्दे

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, सपा के आगामी संगठनात्मक चुनाव, रामपुर की स्थिति और विधानसभा उपचुनावों पर रणनीति पर भी चर्चा की। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने आज़म ख़ान को पार्टी की कोर टीम में सलाहकार भूमिका देने का संकेत दिया है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“यह मुलाकात सिर्फ भावनात्मक नहीं थी, इसमें राजनीतिक दूरदर्शिता भी साफ़ झलक रही थी। दोनों नेताओं ने महसूस किया है कि सपा को मजबूत करने के लिए एकजुटता ही एकमात्र रास्ता है।”

खामोशी में छिपे कई संदेश

मुलाकात के बाद किसी ने मीडिया से बात नहीं की। लेकिन दोनों के चेहरों की झलक और मुस्कुराहट ने संकेत दे दिया कि कुछ दरवाज़े फिर खुल गए हैं। आज़म ख़ान के करीबी नेताओं ने भी मुलाकात को “सकारात्मक और भरोसेमंद शुरुआत” बताया है।

आने वाले दिनों में दिखेगा असर

राजनीतिक हलकों में अब चर्चा है कि यह मुलाकात सपा के आगामी लोकसभा अभियान की दिशा तय कर सकती है। आज़म ख़ान के समर्थक भी अब धीरे-धीरे सक्रिय होते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही रामपुर में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित कर सकती है, जिसमें अखिलेश यादव और आज़म ख़ान मंच साझा करेंगे।

पार्टी में “नई पारी” की शुरुआत

यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि सपा के भीतर के मतभेद पूरी तरह खत्म हो गए हैं, लेकिन इतना तो तय है कि लखनऊ की इस खामोश मुलाकात ने एक नई राजनीतिक कहानी लिखनी शुरू कर दी है।

राजनीतिक जानकारों के शब्दों में “कभी दूरी ने दरारें बढ़ाईं थीं, अब वहीं खामोशी रिश्ते जोड़ रही है।”

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