
स्वराज इंडिया न्यूज़ डेस्क | नई दिल्ली
देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस वक्त हंगामा मच गया जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। इस दौरान कोर्टरूम में कुछ पल के लिए अफरा-तफरी मच गई। आरोपी वकील अचानक उठ खड़ा हुआ और जोर-जोर से चिल्लाने लगा — “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान!”देखते ही देखते उसने अपनी सीट से जूता निकाला और उसे CJI की ओर फेंकने का प्रयास किया।घटना इतनी तेज़ी से हुई कि सुरक्षा कर्मी तुरंत हरकत में आए। बताया जा रहा है कि आरोपी CJI के बेहद करीब तक पहुंच गया था, तभी कोर्ट रूम में मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अन्य वकीलों ने उसे रोक लिया। इस दौरान वकील ने न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की ओर भी कोई वस्तु फेंकी, जो उन्हें लगते-लगते बची। बाद में आरोपी ने जस्टिस चंद्रन से माफी मांगी और कहा कि उसका निशाना CJI थे।वकील की इस हरकत से पूरे कोर्ट में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया, लेकिन CJI गवई ने पूरी शांति के साथ कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने तत्काल आरोपी को कोर्ट परिसर से बाहर निकलवाया और पूछताछ के लिए सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया।
भगवान विष्णु पर टिप्पणी बनी विवाद की जड़

जानकारी के मुताबिक, आरोपी वकील CJI गवई की भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी से गहराई से आहत था। दरअसल, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में खजुराहो के जावरी मंदिर से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसमें भगवान विष्णु की सात फीट ऊंची प्रतिमा के पुनर्स्थापना की मांग की गई थी।
उस सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की थी —
“यह मामला प्रचार पाने के लिए दायर किया गया है… जाकर स्वयं भगवान से कुछ करने के लिए कहिए। अगर आप वास्तव में विष्णु भगवान के प्रति आस्था रखते हैं, तो प्रार्थना करें और ध्यान लगाएं।”
यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी और कई संगठनों ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताया था। इसके बाद ट्विटर (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर#RemoveJusticeGavaiट्रेंड करने लगा।कई धार्मिक संगठनों ने इस टिप्पणी को “सनातन विरोधी” करार दिया और CJI के खिलाफ महाभियोग की ऑनलाइन मांग तक उठा दी थी। हालांकि बाद में CJI गवई ने सफाई देते हुए कहा कि, “मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं, और मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।”फिर भी, कुछ वकील और धार्मिक संगठनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। सोमवार की घटना को उसी नाराज़गी की कड़ी माना जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच के आदेश
सुप्रीम कोर्ट परिसर जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह पर इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना न केवल न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है बल्कि देश की न्याय प्रणाली के सम्मान को भी चोट पहुंचाती है।घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने आंतरिक जांच के आदेश जारी किए हैं। सुरक्षा एजेंसियां आरोपी की पहचान, उद्देश्य और पृष्ठभूमि की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत वकील है, जिसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पहले से ही धार्मिक विषयों पर पोस्ट मौजूद थीं।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी वकील पिछले कई दिनों से कोर्ट परिसर में देखा जा रहा था और वह बार-बार CJI से “माफी मांगने या जवाब देने” की बात कर रहा था। माना जा रहा है कि उसने पहले से सुनियोजित तरीके से कोर्ट में घुसकर यह हरकत की।
वकीलों और नागरिकों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अध्यक्ष अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा —
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। असहमति प्रकट करने के अपने तरीके हैं, लेकिन अदालत में इस तरह का व्यवहार न्यायपालिका के प्रति असम्मान है।”
वहीं, कुछ धार्मिक संगठनों ने आरोपी वकील के समर्थन में सोशल मीडिया पर लिखा कि “वह सनातन धर्म का अपमान सह नहीं सका।”इस बीच, कई वरिष्ठ वकीलों ने यह भी कहा कि “अदालत के भीतर किसी भी प्रकार की हिंसा या नारेबाजी की कोई जगह नहीं हो सकती।”
मुख्य बिंदु📌
- 1. सुप्रीम कोर्ट में वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की।
- 2. आरोपी ने नारा लगाया — “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
- जस्टिस विनोद चंद्रन को वस्तु लगते-लगते बची, आरोपी ने मांगी माफी।
- आरोपी वकील भगवान विष्णु पर CJI की टिप्पणी से नाराज़ था।
- 5. कोर्ट में हंगामे के बाद भी CJI ने शांति से सुनवाई जारी रखी।
- 6. सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सुरक्षा चूक पर आंतरिक जांच शुरू की।
- 7. सोशल मीडिया पर ‘न्यायपालिका और धर्म’ पर बहस फिर हुई तेज।


