Friday, February 13, 2026
Homeराज्यउत्तर प्रदेश23 माह बाद जेल से रिहा हुए आजम खान, सपा की खामोशी...

23 माह बाद जेल से रिहा हुए आजम खान, सपा की खामोशी से बढ़ी सियासी अटकलें

क्या बसपा में जा सकते हैं आजमखान… सूत्र

प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया। लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत के कद्दावर नेता और रामपुर से पूर्व विधायक आज़म खान 23 माह बाद जेल से बाहर आ गए हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली रिहाई को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया, लेकिन खुद आजम खान ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है। उनकी यह खामोशी और समाजवादी पार्टी (सपा) की ठंडी प्रतिक्रिया सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।रिहाई के बाद सपा नेतृत्व की ओर से कोई बड़ा स्वागत कार्यक्रम या जश्न नहीं मनाया गया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर कोई खास टिप्पणी नहीं की।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आजम खान की पहचान एक कट्टर मुस्लिम नेता के तौर पर रही है और मौजूदा समय में सपा गैर-मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश में है। ऐसे में आजम की छवि पार्टी के लिए चुनौती साबित हो सकती है।आजम खान ने अपने राजनीतिक जीवन में रामपुर से लेकर लखनऊ तक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। मुस्लिम राजनीति में उनका नाम हमेशा अहम माना गया है। लेकिन मौजूदा समीकरणों में सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। भाजपा जहां हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर काम कर रही है, वहीं सपा मुस्लिम समेत अन्य जातीय समूहों को जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।रिहाई के बाद आजम खान के सामने कई विकल्प खुले हैं। पहला रास्ता बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का है, जो दलित-मुस्लिम समीकरण पर काम कर रही है और आजम जैसे कद्दावर मुस्लिम चेहरे की तलाश में है। दूसरा विकल्प असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम है, जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा आजम खान नई पार्टी बनाकर अपनी अलग सियासी पहचान कायम करने या छोटे दलों के साथ गठबंधन का नेतृत्व करने का रास्ता भी अपना सकते हैं।कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के साथ जुड़ने की संभावना भी राजनीतिक चर्चाओं में है।

हालांकि, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह विकल्प मजबूत नहीं माना जा रहा।फिलहाल, आजम खान ने खामोशी साध रखी है। सियासी पर्यवेक्षकों का कहना है कि वह पहले सपा के रुख का इंतजार कर रहे हैं। अगर पार्टी ने दूरी बनाए रखी, तो वह मजबूरन नया रास्ता तलाश सकते हैं। आने वाले महीनों में आजम खान का अगला कदम न केवल उनके राजनीतिक भविष्य को तय करेगा, बल्कि प्रदेश की चुनावी राजनीति पर भी गहरा असर डालेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!