
भव्य दीपोत्सव आयोजन की आड़ में करोड़ों रुपयों का घोटाला होने का अनुमान है। भुगतान में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं हैं व्यय अनुमान 39.83 लाख रुपये का बनाया गया, लेकिन कार्यस्थल और कार्य का कोई विवरण ही नहीं दिया गया न बिल लगाएं गए हैं
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो/अयोध्या।
भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में प्रतिष्ठा के बाद पहला दीपोत्सव 2023 ऐतिहासिक रहा। बाइस लाख से अधिक दीपों से जगमगाई अयोध्या ने विश्व-रिकॉर्ड कायम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपोत्सव की भव्यता पर कहा था लाखों दीयों से जगमग अयोध्या नगरी से सारा देश प्रकाशमान हो रहा है, मेरी कामना है कि भगवान श्रीराम समस्त देशवासियों का कल्याण करें। लेकिन प्रधानमंत्री की यह कामना नगर निगम अयोध्या के अफसरों पर “कल्याण” बनकर बरसी। दीपोत्सव की भव्यता के पीछे छत्तीस लाख रुपए से ज्यादा का घोटाला जिम्मेदारों ने रच डाला।36 लाख का खेल कैसे हुआ?नगर निगम ने 30 मार्च 2024 को 34,30,463 रुपये का भुगतान मेसर्स घृति कंस्ट्रक्शन को कर दिया। दावा किया गया कि दीपोत्सव 2023 के दौरान निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति हुई थी। लेकिन असलियत में इस भुगतान में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। व्यय अनुमान 39.83 लाख रुपये का बनाया गया, लेकिन कार्यस्थल और कार्य का कोई विवरण ही नहीं दिया गया।आपूर्ति का कोई बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। सामग्री की प्रविष्टि भंडार में दर्ज ही नहीं कराई गई।उपयोग लेखा अनुपस्थित—पता ही नहीं कि सामग्री कहां और किस कार्य में लगी। दीपोत्सव अक्टूबर 2023 में हो चुका था, लेकिन आपूर्ति की तिथि 16 मार्च 2024 दर्ज की गई।बॉक्ससामग्री और लागत का हिसाब-बालू: 390.25 घन मीटर, लागत ₹4,29,275-राविश: 413.85 घन मीटर, लागत ₹4,17,850-ईंट: 10,000 नग, लागत ₹69,000-सीमेंट: 475 बोरी, लागत ₹1,47,250-मोरंग: 78.84 घन मीटर, लागत ₹2,22,328-एमएस स्टील: 5 कुंतल, लागत ₹37,500-स्टोन ग्रिट: 39.42 घन मीटर, लागत ₹1,32,057-मजदूर: 6,000 दिन, ₹19,20,000कुल योग: ₹33,75,260 (निविदा दर घटाने व जीएसटी जोड़ने के बाद भुगतान ₹36,20,372)।बता दे कि सबसे बड़ा खेल मजदूरों के नाम पर हुआ। रिकॉर्ड में 6,000 मजदूर दिखाए गए, जिन्हें 320 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से ₹19,20,000 का भुगतान दर्शाया गया। लेकिन कितने मजदूर लगे?कितने दिनों तक काम किया?दीपोत्सव खत्म होने के बाद किस काम में मजदूरी दी गई? इसका कोई जवाब नगर निगम नहीं दे सका। पत्रकारो की पड़ताल में सामने आया कि दीपोत्सव के नाम पर सामग्रियों का कोई भौतिक सत्यापन नहीं हुआ। भंडार प्रविष्टि नहीं, कार्यस्थल का विवरण नहीं, और न ही उपभोग का लेखा। साफ है कि नगर निगम ने कागजों पर आपूर्ति दिखाकर करोड़ों की रकम हड़प ली।जिस दीपोत्सव को अयोध्या की संस्कृति, भक्ति और भव्यता का प्रतीक बताया गया, उसी की रोशनी में नगर निगम अयोध्या ने भ्रष्टाचार का ऐसा अंधकार फैलाया जिसने पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



