
एआई तकनीकी आ जाने से कई सेक्टर में मानव नौकरी पर बड़ा खतरा आ गया है
सेल्सफोर्स ने 4,000 कर्मचारियों को निकाला
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली।
तकनीक के लगातार बढ़ते दायरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल ने देश-दुनिया की नामचीन कंपनियों में रोजगार पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने स्टाफ की कटौती कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत सरकार समय रहते एआई को लेकर ठोस नीति और नियम नहीं बनाती, तो आने वाले दिनों में छंटनी का यह सिलसिला और तेजी पकड़ सकता है, जिससे बेरोजगारी का प्रकोप और बढ़ेगा।
अमेरिकी क्लाउड सॉफ्टवेयर कंपनी सेल्सफोर्स ने हाल ही में अपने कस्टमर सपोर्ट डिपार्टमेंट में 4,000 नौकरियों में कटौती कर दी है। कंपनी के सीईओ मार्क बेनिओफ ने पॉडकास्ट के जरिए बताया कि सपोर्ट टीम को 9,000 से घटाकर 5,000 कर दिया गया है। अब इनकी जगह एआई आधारित टूल्स काम करेंगे।
टीसीएस: बढ़ी सैलरी, लेकिन 12,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने सितंबर 2025 से 80% कर्मचारियों की सैलरी में 4.5 से 7% की बढ़ोतरी की घोषणा की है। लेकिन इसके साथ ही कंपनी ने 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी भी की है। वजह बताई गई है—एआई, ऑटोमेशन और सख्त बेंच नीति। इस कदम का कई राज्यों में विरोध हुआ और कर्मचारियों के संगठनों ने सरकार से दखल की मांग की।
इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और मेटा में भी कटौती
2025 में सिर्फ टीसीएस और सेल्सफोर्स ही नहीं, बल्कि इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा, अमेजन, एचपी और पैनासोनिक जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी की है।
इंटेल : 25,000 से ज्यादा नौकरियों में कटौती (लागत और एआई आधारित पुनर्गठन)।
पैनासोनिक : 10,000+ कर्मचारियों को निकाला (कार्यशैली में बदलाव और लागत कटौती)।
माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा : लागत कम करने और एआई अपनाने के चलते हजारों कर्मचारियों को हटाया।
रोजगार पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से निवेश कर रही हैं। इससे उत्पादकता तो बढ़ेगी, लेकिन बड़ी संख्या में नौकरियों पर खतरा मंडराता रहेगा। हालात ऐसे हैं कि आने वाले समय में कई क्षेत्रों में पारंपरिक नौकरियों की जगह पूरी तरह मशीनें ले सकती हैं।
एआई और ऑटोमेशन जहां कंपनियों को लागत बचाने और तेज़ी से काम करने का नया साधन दे रहे हैं, वहीं लाखों कर्मचारियों के भविष्य को अनिश्चितता में भी डाल रहे हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार समय रहते एआई उपयोग को लेकर ठोस नीति बनाकर रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगी?



