
न्यूज़ डेस्क स्वराज इंडिया | नई दिल्ली
खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति को लेकर की गई टिप्पणी से उठे विवाद पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने गुरुवार को सफाई दी। सीजेआई ने कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई गवई ने कहा “किसी ने मुझे बताया कि मेरी टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर गलत अर्थ में लिया गया है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।”
मामला कैसे शुरू हुआ

दरअसल, कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित यूनेस्को की विश्व धरोहर जावरी मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची मूर्ति की पुनःस्थापना को लेकर याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए सीजेआई गवई ने इसे “प्रचार हित याचिका” बताते हुए खारिज कर दिया था। साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा था “तुम कहते हो कि तुम भगवान विष्णु के भक्त हो, तो जाओ और प्रार्थना करो। यह एक पुरातात्विक स्थल है और इसके लिए एएसआई की अनुमति जरूरी होगी।”इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नाराजगी जताई। कई यूजर्स ने इसे हिंदू भावनाओं को आहत करने वाला बताया और बयान वापस लेने की मांग उठाई।
प्रतिक्रियाओं की बौछार

एडवोकेट विनीत जिंदल ने सीजेआई की टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है और इस बाबत राष्ट्रपति को पत्र भी भेजा है। वहीं, एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने महाभारत के उस श्लोक का जिक्र किया जो सर्वोच्च न्यायालय के प्रतीक चिह्न पर अंकित है और जिसमें भगवान कृष्ण (जो विष्णु के अवतार माने जाते हैं) का उल्लेख है।पत्रकार राहुल शिवशंकर ने भी इस बयान को “असंवेदनशील” करार दिया और सवाल उठाए।
मुख्य बिंदु
- भगवान विष्णु की मूर्ति पर टिप्पणी को लेकर विवादों में आए CJI गवई
- बोले “मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया”
- सभी धर्मों का सम्मान करता हूं : सीजेआई
- याचिका खारिज करते हुए कहा था “जाओ और भगवान से प्रार्थना करो”
- बयान पर वकीलों, संगठनों और पत्रकारों की तीखी प्रतिक्रिया



