
निर्मल तिवारी स्वराज इंडिया
कानपुर । गजानन सरकार के भक्तों का इंतजार खत्म होने वाला है। कल 27 अगस्त को कानपुर में घर-घर गजानन विराजेंगे। शहर में एक हजार से अधिक छोटे बड़े पंडालों में गणपति बप्पा के भव्य स्वागत की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। कभी केवल महाराष्ट्र में ही धूमधाम से मनाया जाने वाला यह पर्व क्षेत्र की सीमाओं का व्युत्क्रम कर अब पूरे देश में उत्साह पूर्वक मनाया जाने लगा है। कानपुर भी इससे अछूता नहीं है। इस बार 27 अगस्त से 6 सितंबर तक 11 दिवसीय आयोजन होगा।

सज रहे आकर्षक एवं भव्य
11 दिनों तक गणपति बप्पा के सानिध्य में रहने, उनकी कृपा पाने को आतुर गणेश भक्तों ने पंडालों को भव्य दिव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। तमाम कारीगर सजावट को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। इस बार लगातार हो रही बरसात को देखते हुए अधिकांश आयोजकों ने वाटरप्रूफ पंडाल को वरीयता दी है।
धार्मिक के साथ सांस्कृतिक आयोजनों पर भी फोकस
कानपुर में होने वाले अधिकांश गणेश महोत्सव आयोजनों में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी प्रमुखता दी गई है। इस अवसर पर कानपुर के अलग-अलग पंडालों में उत्तर भारत की परंपराओं और संस्कृति की सतरंगी छटा देखने को मिलेगी ।

आज ही प्रतिमा लाने पर आयोजकों का जोर
कल गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना होनी है। अधिकांश भक्त गाजे बाजे ढोल नगाड़े और गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया के गगनभेदी जयकारों के साथ उत्साहपूर्वक गणेश जी की प्रतिमा को आयोजन स्थल तक ले जाते नजर आ रहे हैं। सार्वजनिक श्री गणेश महोत्सव के अधिकांश आयोजकों की प्राथमिकता गणेश जी की प्रतिमा आज ही लाने की है। मूर्तिकारों का कहना है 90% से ज्यादा भक्त आज ही मूर्तियां ले जाएंगे।


