
जयपुर: स्वराज इंडिया विशेष रिपोर्ट
राजस्थान के उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल साहू की नृशंस हत्या को आज भी उनके परिवार वाले नहीं भूल पाए हैं। 28 जून 2022 की वह दोपहर जब धार्मिक कट्टरता की आग में इंसानियत को बेरहमी से कुचला गया, उसका ज़ख्म आज भी ताजा है। तीन साल बीत चुके हैं, मगर इंसाफ अब तक दूर है। हत्यारों को गिरफ्तार तो कर लिया गया, लेकिन अदालत का फैसला अब भी अधूरा है।अब इस दर्दनाक सच्चाई को बड़े परदे पर लाया जा रहा है—फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ के ज़रिए। यह फिल्म 11 जुलाई को रिलीज़ हो रही है, जिसका उद्देश्य है – देश को उस वहशियाना हकीकत से रूबरू कराना जिसे भूल जाना खतरनाक होगा।
🎬 फिल्म नहीं, एक पुकार है इंसाफ की
फिल्म के निर्माता अमित जानी कहते हैं, “कई बार देश की चेतना को झकझोरने के लिए कला को आवाज़ बनाना पड़ता है। यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, न्यायिक सिस्टम पर सवाल है, एक ऐसी चुभन है जो तब तक खत्म नहीं होगी जब तक गुनहगारों को सजा नहीं मिलेगी।” कन्हैयालाल साहू की पत्नी जसोदा देवी और बेटे यश व तरुण इस फिल्म के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि जब कानून से उम्मीद टूटने लगती है तो समाज का साथ नई ताकत देता है।यश साहू कहते हैं, “हमारा पिता कोई अपराधी नहीं था, उसे सिर्फ एक पोस्ट के लिए मार दिया गया। अगर ऐसे केस में भी इंसाफ देर से मिलेगा तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी क्या है?”
⚖️ इंसाफ की राह में देरी, समाज की चेतना पर असर
फिल्म के समर्थन में कई बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन सामने आए हैं। सबका मानना है कि न्याय में देरी न्याय से इनकार के बराबर है। वहीं दूसरी ओर कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने फिल्म को लेकर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि फिल्म से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। फिल्म के विरोध में सोशल मीडिया पर बायकॉट का संदेश फैलाने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सूरजपोल थाना प्रभारी रतन सिंह चौहान ने बताया कि सैयदद हाफिज उर्फ बबलू और शराफत खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश और भड़काऊ संदेश फैलाने का आरोप है।
🎥 ‘उदयपुर फाइल्स’ – सिनेमा से जागेगी न्याय की लौ
जैसे ‘कश्मीर फाइल्स’ ने पेंडिंग जख्मों को खोला, और ‘अजमेर फाइल्स’ ने सच्चाई को सामने लाया, उसी राह पर ‘उदयपुर फाइल्स’ भी एक दस्तावेज़ बनने जा रही है – सिस्टम, समाज और समय के खिलाफ एक बयान। “अगर हम इन घटनाओं को फिल्म तक सीमित मानकर भूल जाएंगे, तो अगली हेडलाइन किसी और निर्दोष की हो सकती है। न्याय केवल कोर्ट का काम नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है।” 11 जुलाई को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरेगी, तब यह केवल एक स्क्रीनिंग नहीं होगी, यह कन्हैयालाल साहू के लिए न्याय की प्रतीक्षा में जलती एक लौ होगी।
नई जानकारी: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (अर्शद मदनी संप्रदाय), जिसके अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी हैं, ने हाल ही में इस फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है।ज़ाहिर है, संगठन का तर्क है कि इस फिल्म से धर्म‑आधारित भावनाएं आहत हो सकती हैं और इससे सामाजिक सौहार्द में खलल पड़ने की संभावना है।
⚖️ याचिका में बताया गया क्या है?
सीमित नहीं, पूरे देश में रिलीज पर रोक – संगठन ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की सिनेमाघर, ओटीटी और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ को रोकने की मांग की है।संविधान की आधारशिला Articles 14, 15, 21 उल्लंघन – याचिका में कहा गया है कि फिल्म धार्मिक मामलों में विभाजन पैदा कर सकती है और न्याय का अधिकार भी प्रभावित हो सकता है।सीबीएफसी की प्रमाणन प्रक्रिया को चुनौती – यह भी कहा गया है कि फिल्म की मंज़ूरी देने में केंद्रीय सर्टिफाइंग बोर्ड द्वारा संवैधानिक मसलों पर कारगर मूल्यांकन नहीं किया गया।



