स्वराज इंडिया / कानपुर
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के पावन अवसर पर कानपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब श्रद्धा के इस उत्सव को दो गुटों के बीच हुए हिंसक टकराव ने कलंकित कर दिया। रथयात्रा के दौरान ओमर वैश्य रामकृष्ण मंडल और दोसर वैश्य नवयुवक मंडल के बीच झड़प हो गई, जिसने पूरे इलाके में तनाव फैला दिया।

क्या था विवाद का कारण?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यात्रा के दौरान झांकी निकालने की समय-सीमा और साज-सज्जा को लेकर पहले तो दोनों मंडलों में कहासुनी हुई, लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। एक गुट की महिलाओं ने दूसरे पक्ष पर अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिससे विवाद उग्र हो गया। देखते ही देखते ढोल-मनजीरे, बोतलें और लाठियाँ हवा में चलने लगीं। कई श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं।
श्रद्धा शर्मसार, पुलिस लाचार
घटना के तुरंत बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। लेकिन प्रशासन की भूमिका पर सवाल तब उठे जब रथयात्रा से एक दिन पहले ही महंतों और पुलिस के बीच लाउडस्पीकर लगाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि पुलिस ने कई महंतों से अभद्रता की थी। इसका विरोध सपा और भाजपा दोनों के स्थानीय नेताओं ने भी किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी और एक सब-इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया।
घायल और भयभीत श्रद्धालु
इस झड़प में आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। यात्रा में शामिल कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ घबराए हुए बीच रास्ते से ही लौट गए। श्रद्धा का जोश, भय और अफरातफरी के आगे फीका पड़ गया।
अब क्या आगे होगा?
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। स्थानीय समाजसेवियों और धार्मिक संगठनों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस पवित्र आयोजन की गरिमा बनी रहे।
एक सवाल समाज से…
जब भगवान की यात्रा के बहाने समाज को जोड़ने की परंपरा है, तो क्या निजी अहंकार और समूहवाद इस एकता को चीरने का माध्यम बनते रहेंगे? श्रद्धा का उत्सव यदि मारपीट और असहिष्णुता में तब्दील हो जाए, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?


