
महोबा में भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने बुधवार को राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी को थप्पड़ जड़ दिए। उससे कहा- तुम अखिलेश यादव से मिले हो, गरीब लोगों की बलि क्यों चढ़ाना चाहते हो। बीज किसे भेज रहे थे, बताते क्यों नहीं। इनके लिए जूते की माला मंगाओ
स्वराज इंडिया ब्यूरो/महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में राजकीय कृषि बीज भंडार से चने की करीब 100 बोरियां दूसरे स्थान पर भेजे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। चरखारी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत बुधवार देर शाम मौके पर पहुंचे और बीज भेजने से संबंधित आदेश दिखाने को कहा। आदेश प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विधायक ने बीज भंडार प्रभारी सोनू सिंह यादव के प्रति नाराजगी जताई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

करीब 100 बोरी बीज कुलपहाड़ भेजने पर उठे सवाल
प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, विधायक को सूचना मिली थी कि राजकीय कृषि बीज भंडार से चने के बीज की लगभग 100 बोरियां पिकअप वाहन के जरिए कुलपहाड़ क्षेत्र में भेजी जा रही हैं। इसके बाद वह मौके पर पहुंचे और बीज ले जाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी।
मौके पर मौजूद बीज भंडार प्रभारी सोनू सिंह यादव से जब बीज भेजने के संबंध में सक्षम अधिकारी का आदेश मांगा गया, तो वह आदेश नहीं दिखा सके। इस पर विधायक ने नाराजगी जताई और कृषि विभाग के अधिकारियों से मामले की जानकारी ली।
‘अखिलेश यादव से मिले हो?’ कहकर जताई नाराजगी
घटना से जुड़े वायरल वीडियो के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विधायक ने प्रभारी से सवाल करते हुए उन्हें समाजवादी पार्टी से जुड़ा बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि क्या वह अखिलेश यादव से मिले हुए हैं और किसानों के हितों की अनदेखी क्यों की जा रही है।
वीडियो में विधायक की नाराजगी और बीज भेजे जाने को लेकर सवाल उठाने की बात सामने आई है। कुछ विवरणों में प्रभारी को थप्पड़ मारने का दावा भी किया गया है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट से इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए घटना के इस पहलू पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
उप कृषि निदेशक ने क्या कहा?
विधायक ने मामले की जानकारी उप कृषि निदेशक रामसजीवन को फोन पर दी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने बीज भेजने का आदेश जारी करने से इनकार किया और मामले की जांच किए जाने की बात कही।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बीज को दूसरे स्थान पर भेजने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, इसके लिए कोई अधिकृत अनुमति थी या नहीं और पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
इस घटनाक्रम ने सरकारी बीज वितरण व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, केवल आदेश उपलब्ध नहीं होने या मौके पर हुए विवाद के आधार पर किसी कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित विभाग के आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल, बीज की बोरियों को दूसरे स्थान पर भेजने के मामले में कृषि विभाग की जांच पर निगाहें टिकी हैं।


