
यूपी में SIR पर बवाल, पीलीभीत में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी के बाद अधिकारियों पर एक्शन
13,150 नाम बदलने के कांग्रेस के आरोप से मचा हड़कंप, अब पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की जांच
EPIC नंबर डालने पर दिख रहा था दूसरे वोटर का विवरण, पीलीभीत में कार्रवाई के निर्देश
कांग्रेस ने उठाए सवाल तो निर्वाचन विभाग हरकत में, ERO और VRC ऑपरेटर हटाने के आदेश
वोटर लिस्ट विवाद ने पकड़ा तूल, पीलीभीत से पूरे यूपी तक जांच के निर्देश
SIR पर कांग्रेस का हमला, निर्वाचन विभाग की जांच में मिली गड़बड़ी, 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट
स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठा विवाद अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने जांच के आधार पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से हटाने तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि पीलीभीत सदर में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, जबकि उनके EPIC नंबर और मतदाता सूची की क्रम संख्या वही रही। हालांकि, आधिकारिक जांच में अभी तक जिस गड़बड़ी की पुष्टि बताई गई है, वह कुछ EPIC नंबरों को ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाताओं का विवरण दिखाई देने से संबंधित है। कांग्रेस के सभी आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
13,150 मतदाताओं के नाम बदलने का कांग्रेस का दावा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इस दौरान यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, सांसद इमरान मसूद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत मौजूद रहे।
राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में जुलाई से सितंबर 2026 के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और मतदाता सूची के क्रमांक में बदलाव नहीं हुआ। कांग्रेस का कहना है कि ऐसी विसंगति से मतदान के दिन मतदाताओं को अपनी पहचान और सूची में दर्ज विवरण को लेकर परेशानी हो सकती है।
पार्टी ने मतदाता सूची से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने और ऐसे लोगों के नाम जोड़े जाने का भी आरोप लगाया, जिनके संबंधित क्षेत्र में रहने पर सवाल हैं। अलग-अलग प्रकाशित रिपोर्टों में हटाए गए नामों की संख्या 804 और 884 बताई गई है, जबकि कांग्रेस ने 2,600 कथित संदिग्ध नाम जोड़े जाने का भी दावा किया। इन सभी आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि को लेकर जांच जारी है।
चुनाव आयोग की जांच में क्या सामने आया?
शिकायतों के बाद पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से मामले की जांच कराई गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, जांच में कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर उनके बजाय दूसरे मतदाताओं का विवरण दिखाई देने की गड़बड़ी सामने आई।
इसके बाद विधानसभा क्षेत्र संख्या 127, पीलीभीत सदर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची से संबंधित काम से हटाने के निर्देश दिए गए। दोनों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की जिम्मेदारी तय करने के लिए भी रिपोर्ट मांगी गई है। कार्रवाई के निर्देश जारी होना इस बात का अंतिम निष्कर्ष नहीं है कि कांग्रेस के सभी आरोप सही साबित हो गए हैं। जांच के बाद ही गड़बड़ी की व्यापकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।
अब पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों की जांच
पीलीभीत में गड़बड़ी सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पीलीभीत जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी गहन जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से अपने-अपने जिलों की विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच करने और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं दूसरे क्षेत्रों में भी EPIC नंबर और मतदाताओं के विवरण के बीच ऐसी विसंगतियां तो नहीं हैं।
आराधना मिश्रा, इमरान मसूद और सुप्रिया श्रीनेत ने क्या कहा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने मतदाता सूची से नाम गायब होने को गंभीर मामला बताते हुए कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर कानूनी राय लेगी और मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मतदाता सूची में अपने नाम और विवरण की जांच करना हर नागरिक के लिए जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे को संसद, सड़क और अदालत तक ले जाने की बात कही।
वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने मतदाताओं से अपना EPIC नंबर डालकर मतदाता सूची में दर्ज नाम और अन्य विवरण जांचने की अपील की।
मतदाता अपने नाम और विवरण की जांच कैसे करें?
मतदाता भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना नाम और विवरण जांच सकते हैं। यदि EPIC नंबर डालने पर गलत व्यक्ति का विवरण दिखाई देता है या सूची में नाम नहीं मिलता, तो संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अथवा निर्वाचन कार्यालय से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल: https://voters.eci.gov.in/
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में सामने आई विसंगतियों ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता डेटा की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जबकि निर्वाचन विभाग ने शुरुआती जांच में EPIC नंबर से जुड़े विवरण की गड़बड़ी मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की है।
अब सभी जिलों से मांगी गई रिपोर्ट और आगे की जांच से स्पष्ट होगा कि यह समस्या कितने मतदाताओं से जुड़ी है, इसके पीछे क्या कारण हैं और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है। मतदाता सूची में सही विवरण सुनिश्चित करना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है।


