
स्वराज इंडिया ब्यूरोग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने जहांनाबाद कादलपुर गांव में किराए के ठिकानों पर संचालित दो कथित गुप्त ड्रग निर्माण प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध नशीली सामग्री, रसायन और उपकरण बरामद किए गए। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
379 किलोग्राम से अधिक सामग्री बरामद
जांच एजेंसी की कार्रवाई में कुल 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त सामग्री और 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन बरामद होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाले रसायन और उपकरण भी मिले हैं। बरामद सामग्री की अनुमानित अवैध बाजार कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई है।
अमित शाह ने NCB को दी बधाई
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने इसे खुफिया जानकारी के आधार पर की गई महत्वपूर्ण कार्रवाई बताते हुए नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और ड्रग कार्टेल के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही।
सरकार के घोषित लक्ष्य के मुताबिक, दिसंबर 2029 तक नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
दो गुप्त प्रयोगशालाओं का खुलासा होने के बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NCB ने इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया था। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि स्थानीय पुलिस को इन ठिकानों के संचालन की पहले से जानकारी थी या नहीं।
स्थानीय पुलिस मकान मालिक और किराए पर रहने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन गतिविधियों की जानकारी किसे थी और निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं।
जांच के दायरे में पूरा नेटवर्क
अब जांच एजेंसियों के सामने इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने की चुनौती है। एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि प्रयोगशालाएं कब से संचालित थीं और बरामद सामग्री से जुड़े कारोबार में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
ग्रेटर नोएडा में हुई इस कार्रवाई ने नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण और उनकी आपूर्ति पर रोक लगाने की चुनौती को फिर सामने ला दिया है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े नेटवर्क और स्थानीय निगरानी व्यवस्था के बारे में और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।


