
लखनऊ, 18 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘रूल ऑफ माफिया’ का माहौल था, लेकिन उनकी सरकार ने ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन को लागू किया है।
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के एक माफिया का नाम लिए बिना कहा कि पहले उसका प्रभाव इतना था कि उसके काफिले को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में कानून और संवैधानिक पदों की भी परवाह नहीं की जाती थी।
‘काफिले के लिए जज को भी रोक दिया जाता था’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि पहले माफिया का दबदबा इस हद तक था कि उसके काफिले को रास्ता देने के लिए न्यायाधीश तक को रोके जाने की स्थिति बन जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि माफिया जिस जमीन पर कब्जा कर लेता था, उस पर अपना अधिकार जताने लगता था।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था में माफिया का प्रभाव था, जबकि उनकी सरकार ने कानून के शासन को ईमानदारी से लागू करने का काम किया। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री की ओर से प्रदेश की पिछली और मौजूदा कानून-व्यवस्था की तुलना करते हुए की गईं।
कानून के विद्यार्थियों को दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने विधि के विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी शिक्षा का इस्तेमाल समाज में न्याय और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए करें। उन्होंने युवा वकीलों से अन्याय के खिलाफ खड़े होने, पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने और आम लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के विद्यार्थियों को अपनी डिग्री को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में भी देखना चाहिए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की टिप्पणी ने खींचा ध्यान
समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली भी मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
अपने संबोधन के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें बिना पढ़े भाषण देने के लिए कहा था, लेकिन विश्वविद्यालय के कुलपति ने लिखित भाषण पढ़ने का सुझाव दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार वह कुलपति की बात मान रहे हैं और अगली बार मुख्यमंत्री की सलाह पर बिना कागज देखे भाषण देंगे।
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में कानूनी शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और समाज के प्रति युवा विधि विशेषज्ञों की भूमिका पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री का यह संबोधन उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी सरकार के रुख को फिर सामने लाता है। वहीं, उनके बयान में प्रयागराज के जिस माफिया का उल्लेख किया गया, उसका नाम नहीं लिया गया।


