
स्वराज इंडिया ब्यूरो/प्रयागराज/हिसार, 12 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की प्रयागराज यूनिट में तैनात एक दरोगा पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि शराब तस्करी से जुड़े एक मुकदमे में नाम हटवाने के बदले दो गाय, एक भैंस, जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता और कुर्सी-मेज खरीदने के लिए 35 हजार रुपये मांगे गए। मामले में हरियाणा के हिसार मंडल के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की है।
आरोपी दरोगा की पहचान रणेंद्र कुमार सिंह के रूप में बताई गई है। शिकायतकर्ता मनवीर सिंह उर्फ मन्नू ने कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट जांच एजेंसी को सौंपे थे। शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद 6 अक्टूबर 2026 को मुकदमा दर्ज किया गया।
शराब तस्करी के मुकदमे से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला प्रयागराज के नवाबगंज थाने में दर्ज वर्ष 2023 के एक मुकदमे से संबंधित है। शिकायतकर्ता मनवीर सिंह हरियाणा के हिसार जिले के ब्यानाखेड़ा गांव के निवासी बताए गए हैं।
आरोप है कि इस मुकदमे से नाम हटवाने में मदद करने के बदले दरोगा ने अलग-अलग सामान और नकदी की मांग की। शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित मांगों में पशुओं के साथ जर्मन शेफर्ड कुत्ता और फर्नीचर खरीदने के लिए रुपये भी शामिल थे।
45 ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट सौंपने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने दरोगा के साथ हुई बातचीत से संबंधित करीब 45 ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट हरियाणा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपे थे।
जांच एजेंसी ने शिकायत और उपलब्ध रिकॉर्डिंग की पड़ताल के बाद मामला दर्ज करने की कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दर्ज करने के लिए हरियाणा पुलिस महानिदेशक कार्यालय से पहले अनुमति भी ली गई थी।
हालांकि, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों की अंतिम साक्ष्यगत स्थिति जांच के दौरान तय होगी। एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोपों को अदालत में सिद्ध होना नहीं माना जाता।
6 अक्टूबर को दर्ज हुई एफआईआर
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हिसार मंडल के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में 6 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रावधान के तहत लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ मांगने या स्वीकार करने से संबंधित आरोपों की जांच की जा सकती है।
मामले की आगे की जांच हरियाणा की संबंधित भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी कर रही है। जांच में कथित बातचीत, उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायत में किए गए दावों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस विभाग पर उठे सवाल, जांच के नतीजों पर नजर
इस मामले ने पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून और विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल, दरोगा रणेंद्र कुमार सिंह पर लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी उपलब्ध रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकालती है।


