
कानपुर कारोबारी हत्याकांड में कोर्ट पहुंची शालू, कैमरों से छिपाया चेहरा, 24 घंटे की रिमांड पर 19 सितंबर को सुनवाई
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में आरोपी बहू शालू, विशाल गौतम और राजकिशोर को बुधवार को अदालत में पेश किया गया। पेशी के दौरान शालू कैमरों से अपना चेहरा दुपट्टे से ढकती नजर आईं। पुलिस ने तीनों आरोपियों की 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है, ताकि हत्या से जुड़े घटनाक्रम, डुप्लीकेट चाबी और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों की जांच की जा सके। हालांकि, रिमांड अर्जी पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी और अब 19 सितंबर को इस पर सुनवाई होगी।
कोर्ट में पेशी के दौरान चेहरा ढकती नजर आई शालू
जेल जाने के बाद पहली बार शालू को कोर्ट में पेश किया गया। मीडिया कैमरों को देखते ही वह लगातार दुपट्टे से चेहरा ढकती रहीं। पुलिसकर्मी उन्हें अदालत के अंदर लेकर पहुंचे। उनके भाई और बहन भी कोर्ट में उनसे मिलने पहुंचे, जबकि उनके पति सुब्रत की मौजूदगी की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने मांगी 24 घंटे की कस्टडी रिमांड
कल्याणपुर पुलिस ने शालू, विशाल गौतम और राजकिशोर की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अदालत में आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि हिरासत में पूछताछ के जरिए आरोपियों के बयानों का मिलान किया जाएगा और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जाएंगी।
पुलिस आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने के साथ उन स्थानों तक ले जाने की तैयारी में है, जहां हत्या से पहले वे गए थे। इनमें डुप्लीकेट चाबी बनवाने वाली दुकान भी शामिल है।
19 सितंबर को होगी रिमांड अर्जी पर सुनवाई

बुधवार को अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण रिमांड आवेदन पर बहस नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की। तब पुलिस की 24 घंटे की कस्टडी रिमांड की मांग पर सुनवाई होगी।
डुप्लीकेट चाबी और कॉल रिकॉर्ड जांच के केंद्र में
पुलिस की जांच में सामने आया है कि हत्या से पहले आरोपियों के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, विशाल और राजकिशोर के बीच वारदात से पहले कई छोटी फोन कॉल हुईं, जबकि विशाल के नए मोबाइल नंबर से शालू और सुब्रत से भी संपर्क हुआ था। पुलिस इन कॉल रिकॉर्ड को घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि विशाल ने हत्या से दो दिन पहले नया सिम लिया था। पुलिस के मुताबिक, इस नंबर से शालू और सुब्रत से बातचीत हुई और बाद में यह नंबर बंद कर दिया गया। इन तथ्यों की पुष्टि और उनका कानूनी महत्व जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा।
2022 की वसीयत भी जांच के दायरे में
पुलिस ने कारोबारी परिवार से जुड़ी वर्ष 2022 की वसीयत को भी जांच का हिस्सा बनाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दस्तावेज में संपत्ति के उत्तराधिकारियों का उल्लेख है और पुलिस यह देख रही है कि इसका हत्या के संभावित मकसद से कोई संबंध बनता है या नहीं। हालांकि, वसीयत की मौजूदगी अपने आप में हत्या के कारण या किसी आरोपी की भूमिका साबित नहीं करती।
5 सितंबर को हुई थी कारोबारी की हत्या
विनीत मनोचा की 5 सितंबर की रात कानपुर स्थित उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में उनकी बहू शालू के साथ पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि शालू की भूमिका हत्या की साजिश में रही, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस के निष्कर्षों की न्यायिक प्रक्रिया में जांच होनी बाकी है।
मामले में अभी जांच जारी है। किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज आरोप या पुलिस की जांच में सामने आया तथ्य अदालत में दोषसिद्धि के बराबर नहीं है।


