Thursday, February 12, 2026
Homeअयोध्या2027 की चुनावी पटकथा बना 9.12 लाख करोड़ का यूपी बजट

2027 की चुनावी पटकथा बना 9.12 लाख करोड़ का यूपी बजट

विकास, सुरक्षा और कल्याण के आंकड़ों के सहारे योगी आदित्यनाथ सरकार का ‘विश्वास’ संदेश

स्वराज इंडिया ब्यूरो/ लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार का 2026-27 का 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ रुपये का बजट महज अगले वित्त वर्ष की आय-व्यय योजना नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की ठोस राजनीतिक पटकथा के रूप में देखा जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12.9 प्रतिशत बड़ा यह बजट सत्ता पक्ष के लिए “विश्वास का बजट” है, तो विपक्ष इसे चुनावी वर्ष से पहले संसाधनों के आक्रामक इस्तेमाल की रणनीति बता रहा है।
सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह विकास, सुरक्षा और कल्याण—तीनों मोर्चों पर अपने दावों को ठोस आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बजट के लगभग हर बड़े प्रावधान के पीछे 2027 का संदेश छिपा है।
सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया है। 2024-25 के त्वरित अनुमान के अनुसार प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये और वृद्धि दर 13.4 प्रतिशत बताई गई है। 2016-17 में जहां जीएसडीपी करीब 12.75 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं आठ-नौ वर्षों में इसके ढाई गुना से अधिक होने को सरकार स्थिर शासन और निवेश-समर्थ माहौल का परिणाम बता रही है।
संदेश साफ है कि सत्ता परिवर्तन विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है। यह तर्क शहरी मतदाताओं, उद्यमियों और निवेशकों के बीच प्रमुखता से रखा जाएगा।
2026-27 का बजट विकास, कल्याण, सुरक्षा और पहचान चारों आयामों को जोड़कर तैयार किया गया दस्तावेज है। हर बड़ा आंकड़ा 2027 के मतदाता को ध्यान में रखकर चुना गया प्रतीत होता है।
आने वाले महीनों में यही बजट गांव-गांव और शहर-शहर राजनीतिक बहस का आधार बनेगा। सरकार इन उपलब्धियों के सहारे भरोसा मांगेगी, जबकि विपक्ष इन्हीं दावों की पड़ताल कर जवाबी रणनीति तैयार करेगा। 2027 की जंग का शुरुआती बिगुल बज चुका है और उसका मंच यह बजट बन गया है।

बढ़ती आय का हवाला: मध्यम वर्ग पर फोकस

प्रति व्यक्ति आय 2016-17 के 54,564 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,09,844 रुपये और 2025-26 में 1,20,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान सरकार ने पेश किया है। इसे आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार से जोड़कर बताया जा रहा है।
महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च से जूझ रहे मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण है कि आय बढ़ने से उपभोग और जीवन स्तर दोनों में सुधार हुआ है।

‘गरीबी से मुक्ति’ का सामाजिक कार्ड

सरकार ने दावा किया है कि 6 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाले गए हैं। मुफ्त राशन, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान कार्ड, शौचालय और बिजली कनेक्शन जैसी योजनाओं के करोड़ों लाभार्थियों को जोड़कर सरकार यह दिखाना चाहती है कि गरीब तबका उसकी प्राथमिकता के केंद्र में है।
चुनावी दृष्टि से यह वर्ग सबसे स्थिर और निर्णायक माना जाता है।
बेरोजगारी दर 2.24 प्रतिशत बताकर सरकार ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति का दावा किया है।

2017 से अब तक पुलिस में 2.19 लाख से अधिक भर्तियां

1.58 लाख पदोन्नतियां
60 हजार से अधिक प्रशिक्षणाधीन जवान
83 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी
शिक्षा क्षेत्र में 34 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति
इन आंकड़ों के जरिए संदेश है कि सरकारी नौकरियां घोषणाओं से आगे बढ़ी हैं। शिक्षक और कर्मचारी वर्ग ग्रामीण व कस्बाई राजनीति में प्रभावी राय निर्माताओं के रूप में देखे जाते हैं।
युवाओं के लिए स्वरोजगार का दांव
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बिना गारंटी और बिना ब्याज ऋण देकर हर वर्ष 1 लाख सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार मानती है कि सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या से निराश युवाओं के लिए स्वरोजगार बड़ा विकल्प बन सकता है।
यदि यह योजना अपेक्षित गति से आगे बढ़ती है, तो 2027 तक लाखों परिवार इससे सीधे जुड़ सकते हैं।
किसानों के लिए भुगतान और मुफ्त बिजली
कृषि क्षेत्र में 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से करीब 3000 करोड़ रुपये अतिरिक्त लाभ का दावा किया गया है।
इसके अलावा गेहूं, धान और मोटे अनाज की रिकॉर्ड खरीद और नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था ग्रामीण मतदाताओं के लिए स्पष्ट संदेश है कि सरकार सिंचाई लागत कम करने के पक्ष में है।
महिला मतदाता पर विशेष फोकस
2022 के चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका को ध्यान में रखते हुए बजट में महिला सुरक्षा और कल्याण पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री सुमंगला योजना से 26.81 लाख बालिकाएं लाभान्वित
सेफ सिटी परियोजना
महिला पुलिस बीट
सीसीटीवी नेटवर्क विस्तार
वर्किंग वूमेन हॉस्टल
सरकार महिला सुरक्षा को कानून-व्यवस्था से आगे सामाजिक सशक्तिकरण का विषय बताकर पेश कर रही है।
कानून-व्यवस्था: सुरक्षा की कहानी
डकैती, लूट, हत्या और अपहरण जैसे अपराधों में 40 से 80 प्रतिशत तक कमी के दावे के साथ सरकार यह स्थापित करना चाहती है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। पुलिस ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
यह संदेश खास तौर पर शहरी वर्ग, व्यापारियों और महिलाओं को लक्षित करता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!