
नगर निगम कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर कमिश्नर बृजेंद्र पांडियन ने की संवाद की पहल, 27 जनवरी से पहले समाधान का आश्वासन
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो /कानपुर।
संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति नगर निगम जलकल कानपुर द्वारा उठाई गई पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। 22 जनवरी 2026 को हुई समिति की बैठक में स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के कार्यों के निजीकरण, फेस अटेंडेंस समाप्त करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को समय से वेतन भुगतान, सफाई कर्मचारियों की सुबह 5 बजे की ड्यूटी में शिथिलता देते हुए 7:30 बजे किए जाने सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया था।
इसी क्रम में 26 जनवरी 2026 को संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधि मंडल आयुक्त कानपुर मंडल बृजेन्द्र पांडियन से उनके छह बंगलिया स्थित आवास पर भेंट कर नगर निगम में प्रस्तावित निजीकरण एवं कर्मचारियों की मांगों को लेकर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधि मंडल को मंडल आयुक्त द्वारा आश्वस्त किया गया कि निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में जो भ्रम की स्थिति बनी है, वैसी कोई स्थिति नहीं है। सभी कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआई का लाभ मिलेगा।
मंडल आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि शासन द्वारा गठित सेवा निगम के माध्यम से प्रदेश भर में जिन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सुविधाएं दी जाएंगी, वही लाभ नगर निगम के आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों सहित अन्य कर्मियों को भी प्राप्त होंगे। साथ ही नगर आयुक्त कानपुर से दूरभाष पर वार्ता कर निर्देशित किया गया कि 27 जनवरी 2026 को प्रस्तावित कर्मचारियों की आम सभा से पहले प्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्याओं का समाधान किया जाए तथा वार्ता की कार्यवृत्त जारी की जाए, जिससे आंदोलन का पटाक्षेप किया जा सके।
इससे पहले समिति ने यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि निजीकरण का टेंडर निरस्त नहीं किया गया तो आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा और 27 जनवरी को आम सभा कर कार्यबंदी की घोषणा की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
प्रतिनिधि मंडल में कृष्ण लाल सुदर्शन, रमाकांत मिश्र, धीरज गुप्ता, विनोद कुमार, हरिओम वाल्मीकि, अजीत बाघमार, उस्मान अली शाह, कमरुद्दीन सहित अन्य पदाधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


