Friday, February 13, 2026
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चित्रकूट ट्रेज़री में 120 करोड़ घोटाले के कथित आरोपी की इलाज के दौरान मौत

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी संदीप श्रीवास्तव से इस पूरे नेटवर्क की जानकारी हासिल की जा रही थी, तभी शनिवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पुलिस ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहाँ से हालत गंभीर होने पर उन्हें प्रयागराज रेफर किया गया

स्वराज इंडिया न्यूज़ ब्यूरो
चित्रकूट।

जिले के जिला कोषागार (ट्रेज़री) में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में बड़ा मोड़ आ गया है। इस बहुचर्चित मामले के मुख्य आरोपी सहायक लेखाकार संदीप श्रीवास्तव की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें दो दिन पहले ही हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ रविवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, चित्रकूट कोषागार में करोड़ों रुपये का गबन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पेंशन और वेतन खातों के माध्यम से किया गया था। शुरुआती जांच में करीब ₹43.13 करोड़ की अनियमितता सामने आई है, जबकि सूत्रों का कहना है कि यह रकम ₹120 करोड़ से भी अधिक हो सकती है।

पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक कई दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। विभागीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी संदीप श्रीवास्तव से इस पूरे नेटवर्क की जानकारी हासिल की जा रही थी, तभी शनिवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पुलिस ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहाँ से हालत गंभीर होने पर उन्हें प्रयागराज रेफर किया गया, लेकिन देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया।

घटना के बाद पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस घोटाले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर विचार कर रही है।

वहीं मृतक के परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान उन्हें उचित चिकित्सीय सुविधा नहीं दी गई, जबकि पुलिस का कहना है कि आरोपी की तबीयत बिगड़ते ही उसे तुरंत इलाज के लिए भेजा गया था।

जिला प्रशासन ने कहा है कि इस घटना से जांच प्रभावित नहीं होगी। घोटाले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कोषागार विभाग में भी कई अधिकारियों के तबादले और निलंबन की संभावना जताई जा रही है।

इस पूरे प्रकरण ने सरकारी वित्तीय तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि कैसे एक ही विभाग के भीतर फर्जी भुगतान आदेशों के जरिये बाहर गई, यह अब जांच का सबसे बड़ा सवाल है।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक—

“सरकार घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शेगी नहीं। मृत आरोपी के मोबाइल और लैपटॉप को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है। आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।”

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