Friday, February 13, 2026
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ठंड में मांसपेशियों को सक्रिय और गर्म बनाए रखना जरूरी

आयुष चिकित्सालय में शीत ऋतु स्वास्थ्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

आयुष और फिजियोथेरेपी के संयुक्त उपचार पर जोर देते हुए दी गई उपयोगी जानकारी

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर देहात। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश आर्य के मार्गदर्शन में 50 शैय्या एकीकृत आयुष चिकित्सालय में शीत ऋतु के आगमन पर एक विशेष चिकित्सा गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का उद्देश्य ठंड के मौसम में बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम, उपचार और जागरूकता पर जनहित में चर्चा करना था। कार्यक्रम में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों ने शीत ऋतु में अपनाई जाने वाली उपयोगी चिकित्सा विधियों पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. बृजेश आर्य ने कहा कि ठंड के मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटने से रोगों का खतरा बढ़ जाता है। आयुष चिकित्सा पद्धतियाँ शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित रखती हैं, जबकि फिजियोथेरेपी शरीर की गतिशीलता, लचीलापन और मांसपेशीय कार्यक्षमता को बनाए रखने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से शरीर से विषैले तत्वों का निष्कासन कर सर्दियों में होने वाले जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से राहत पाई जा सकती है।
डॉ. उत्तम कुमार ने कहा कि शीत ऋतु में वात दोष की वृद्धि से जोड़ों में दर्द, अकड़न और नसों में खिंचाव की समस्या आम होती है। ऐसे में स्नेहन (मसाज), स्वेदन (स्टीम थेरेपी) और अभ्यंग (तेल मालिश) अत्यंत लाभकारी हैं। डॉ. जीशान अंसारी ने यूनानी चिकित्सा के दृष्टिकोण से बताया कि सर्दियों में शरीर का बलगमी मिजाज बढ़ जाता है, जिससे आर्थराइटिस, सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस की तकलीफें बढ़ जाती हैं। उन्होंने सुफ़ूफ़-ए-मुसक्किन, हब्बे असगंध, रौगन-ए-मस्ख जैसी यूनानी औषधियों और अदरक, लहसुन, खजूर व दूध में शहद जैसे गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों को उपयोगी बताया।
डॉ. कमलेश प्रजापति ने बताया कि होम्योपैथिक चिकित्सा में भी सर्दियों की बीमारियों का प्रभावी समाधान है।

फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉ. मो. जियाउर्रहमान ने कहा कि ठंड में मांसपेशियों को सक्रिय और गर्म बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मैन्युअल थेरेपी, इलेक्ट्रोथेरेपी, पी.एन.एफ., एन.डी.टी. और फंक्शनल इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन (FES) जैसी तकनीकें मांसपेशियों के लचीलापन, संतुलन और शक्ति को बढ़ाती हैं। साथ ही उन्होंने संतुलित आहार, विटामिन डी, कैल्शियम और पर्याप्त धूप को स्वास्थ्य संरक्षण में आवश्यक बताया।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने यह मत व्यक्त किया कि सर्दियों में आयुष और फिजियोथेरेपी के संयुक्त उपचार से न केवल रोगों की रोकथाम बल्कि पुनर्वास भी प्रभावी रूप से किया जा सकता है।
गोष्ठी में पंचकर्म विभाग से योगेंद्र बाबू, सचिन मिश्रा, अमित पटेल, अनुपम पांडे, ज्योति त्रिपाठी, अजय सिंह, विनय सिंह, फार्मासिस्ट रामकुमार, विनोद और योगेश मिश्रा उपस्थित रहे।

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