
स्वराज इंडिया अखबार को नोटिस भेज दबाव बनाने की कोशिश
स्वराज इंडिया अखबार सच छापने से कभी नहीं डरता और न ही धमकियों से झुकने वाला है
प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया
कानपुर। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री राजू पोरवाल एक बार फिर विवादों में हैं। हाल ही में स्वराज इंडिया अखबार ने अपनी रिपोर्ट में राजू पोरवाल पर गंभीर आरोप प्रकाशित किए थे, जिनमें कहा गया था कि वह कानपुर देहात जिले में गो-तस्करों और हिस्ट्रीशीटरों की मदद करने वालों में शामिल रहे हैं। खबर छपने के बाद अब राजू पोरवाल की ओर से अखबार को लीगल नोटिस भेजा गया है। यह कदम खुद उनके खिलाफ उठे सवालों को दबाने और मीडिया पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोपित व्यक्ति को सफाई देने का पूरा अधिकार है, लेकिन अगर वह मीडिया को ही दबाने की कोशिश करेगा तो यह न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जाएगा। विपक्षी दल भी अब सवाल उठा रहे हैं कि जब गंभीर आरोपों की जांच हो चुकी हुई है, तब ऐसे व्यक्ति को संगठन में ऊँचा पद देना कितना उचित है ?,
गो-तस्करों और हिस्ट्रीशीटरों की मदद के आरोप झेल रहे राजू पोरवाल का स्वराज इंडिया पर कानूनी नोटिस भेजना कहीं न कहीं उनकी घबराहट और सवालों से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या यह मामला कानूनी लड़ाई तक जाएगा या पोरवाल सार्वजनिक मंच पर आकर आरोपों का ठोस जवाब देंगे।
क्या लगे थे आरोप?
राजू पोरवाल, जब कानपुर देहात में जिला शासकीय अधिवक्ता (क्रिमिनल) के पद पर तैनात थे, उस समय उन पर गो-तस्करों और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को बचाने के गंभीर आरोप लगे थे।
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी वह लंबे समय तक अपने पद पर बने रहे।
कई मामलों में अभियोजन की कमजोरी और सबूतों से छेड़छाड़ जैसी कार्यवाहियों का आरोप भी उन पर लगाया गया।

घबराहट में उठाया नोटिस का हथियार
जैसे ही अखबार की यह खबर सामने आई, राजू पोरवाल की तरफ से तुरंत कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में खबर को “बदनाम करने वाली और झूठी” बताया गया है तथा इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर आरोप निराधार हैं तो पोरवाल को खुलकर सबूतों के साथ सफाई देनी चाहिए, न कि अखबार को चुप कराने की कोशिश।
सवाल खड़े हो रहे हैं
- अगर आरोप गलत हैं – तो फिर नोटिस भेजने की बजाय राजू पोरवाल को न्यायालय या सार्वजनिक मंच पर सबूतों से खुद को पाक-साफ साबित करना चाहिए।
- अगर आरोप सही हैं – तो यह और गंभीर मामला है कि इतने विवादों के बावजूद उन्हें विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन में जिम्मेदारी कैसे दी गई?
- मीडिया पर नोटिस का दबाव डालना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की आज़ादी पर हमला माना जा रहा है।



