
रात में ही सुशीला कार्की को नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.
नेपाल की संसद भंग करने पर बनी सहमति…
पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं कार्की अपने बेदाग छवि, सख्त फैसलों और राजनीतिक हस्तक्षेप से परे रहकर काम करने के लिए जानी जाती हैं
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
काठमांडू/नई दिल्ली।
नेपाल के मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की का नाम फाइनल हुआ । पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं कार्की अपने बेदाग छवि, सख्त फैसलों और राजनीतिक हस्तक्षेप से परे रहकर काम करने के लिए जानी जाती हैं। यही कारण है कि आज की उथल-पुथल भरी स्थिति में वे राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए सबसे स्वीकार्य चेहरा बनकर सामने आई हैं।
नेपाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता जरूर है, लेकिन सुशीला कार्की का नाम उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा है। यदि वे अंतरिम सरकार की बागडोर संभालती हैं तो यह नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए और साहसिक प्रयोग के रूप में दर्ज होगा।
नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में सुशीला कार्की ने अपने कार्यकाल में कई साहसिक निर्णय लिए थे। अब उनका नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर सामने आना इस बात का संकेत है कि देश स्थिरता और निष्पक्ष नेतृत्व की तलाश में है।

युवाओं का समर्थन
‘We Nepali’ ग्रुप और जेन-ज़ी आंदोलन के नेता सुदन गुरुंग ने सुशीला कार्की का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि संसद का विघटन और नई अंतरिम कैबिनेट गठन उनकी प्राथमिक मांग है और कार्की का नेतृत्व वे स्वीकार करने को तैयार हैं। हालांकि गुरुंग ने यह भी जोड़ा कि यह कैबिनेट युवाओं की कड़ी निगरानी में काम करेगी, ताकि जनता की उम्मीदों से समझौता न हो।
हालांकि काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन शाह), पूर्व विद्युत प्राधिकरण प्रमुख कुलमान घिसिंग और धरान के मेयर हरका सम्पांग जैसे नाम भी अंतरिम प्रधानमंत्री की दौड़ में हैं, लेकिन राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मौजूदा हालात में सुशीला कार्की के नेतृत्व पर सहमति बनने की संभावना सबसे मजबूत है।

चुनौतियों से भरा है रास्ता
सुशीला कार्की अगर अंतरिम प्रधानमंत्री बनती हैं तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—
संसद के भविष्य पर टकराव सुलझाना,
सीमाओं पर फंसे ट्रकों और गहराते तेल संकट का समाधान करना,
हिंसा और कर्फ्यू से जूझ रहे जनजीवन को सामान्य करना।



