स्वराज इंडिया संवाददाता / अयोध्या।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या को वैश्विक धार्मिक राजधानी बनाने के सपने में जुटे हैं, लेकिन ज़मीन पर पुलिस और नगर निगम की कार्यशैली इस सपने में कील ठोक रही है। रामनगरी की सड़कों पर इन दिनों श्रद्धालु ही नहीं, स्थानीय व्यापारी भी प्रशासन की अघोषित बंदिशों से त्रस्त हैं। नयाघाट से रामजन्मभूमि तक दर्शन और व्यापार के रास्ते में पुलिसिया बेरोकटोक अड़चनें, अव्यवस्थित पार्किंग और ‘ठेकेदारी व्यवस्था’ ने श्रद्धा के साथ कारोबार को भी ठप कर दिया है।
छपिया, कटरा, परशुरामपुर और सरयू के पार के गांवों से आने वाले श्रद्धालु अब अयोध्या तक पहुंचने से पहले ही थक-हार जाते हैं। वजह है – नयाघाट से प्रवेश पर मौखिक प्रतिबंध, दो किलोमीटर दूर की पार्किंग और उससे भी ज्यादा – धूप में 10 किलोमीटर तक पैदल चलने की मजबूरी।
पहले जहां भक्त दर्शन के साथ-साथ खरीदारी कर रामनगरी की अर्थव्यवस्था को गति देते थे, अब वही श्रद्धालु पीछे हट रहे हैं। दुकानदार बेहाल हैं, कारोबार ठप है, लेकिन पुलिस और नगर निगम एक रटी-रटाई दलील दे रहे हैं “जाम न लगे इसलिए ये सब किया गया है।”
असल सवाल यह हैं….
-जब कोई मेला नहीं, कोई आयोजन नहीं तो फिर ये ‘अघोषित प्रतिबंध’ क्यों?
-क्या ये श्रद्धालुओं की सुविधा है या सुनियोजित कष्ट? स्थानीय लोगों की मानें तो दो लेन वाहनों के लिए और दो लेन पैदल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाए तो न सिर्फ यातायात सुगम हो जाएगा बल्कि व्यापार को फिर से संजीवनी मिल सकती है।
श्रद्धालु भी परेशान हैं, दुकानदार टूट चुके हैं और नगर निगम-यातायात विभाग की जोड़ी कान में रुई डाल कर बैठी है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की अयोध्या को विश्वमंच पर प्रतिष्ठित करने की मंशा पर सवाल इसलिए नहीं हैं कि नीयत गलत है, बल्कि इसलिए हैं कि नीचे के भ्रष्ट-प्रशासनिक ढांचे ने इस मंशा को गिरवी रख दिया है। यह अयोध्या अब श्रद्धा का नहीं, डर और धोखे का शहर बनता जा रहा है।